भगवन तेरे भक्त हम भजन
भगवन तेरे भक्त हम भजन
एह भगवन तेरे भक्त हम सवारों हमारे कर्म,हम शरण में रहे चरणों में रहे प्रभु किरपा करो हर दम,
एह भगवन तेरे भक्त हम,
ये तन है जो तूने दिया इक दिन माटी में मिल जाये गा,
जो दुखी हो यहाँ उनकी सेवा करे नहीं भूले कभी फ़र्ज़ हम,
लोह जलते रहे प्यार की बन के दीपक हम जलते रहे,
हम शरण में रहे चरणों में रहे प्रभु किरपा करो हर दम,
एह भगवन तेरे भक्त हम सवारों हमारे कर्म,
ये मन जो पापी बड़ा छल इस में है घर कर रहा,
मन को साफ़ करो इस में करुणा भरो,
दिल में सबके दया भावना,
मशाले जगे प्यार की सब के जीवन में खुशिया रहे,
हम शरण में रहे चरणों में रहे प्रभु किरपा करो हर दम,
एह भगवन तेरे भक्त हम सवारों हमारे कर्म,
सुन्दर भजन में आत्मसमर्पण और प्रभु की कृपा की याचना का गहन भाव प्रकट होता है। यह भजन बताता है कि हमारा तन, मन, और जीवन स्वयं ईश्वर की देन है, जिसे एक दिन मिट्टी में मिल जाना है—लेकिन जब तक यह जीवन है, तब तक इसे सेवा, प्रेम, और करुणा से सार्थक बनाया जाना चाहिए।
भजन में स्पष्ट होता है कि सच्ची भक्ति केवल आराधना तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह अपने कर्तव्य को निभाने और दूसरों की सेवा करने में भी प्रकट होती है। जब व्यक्ति अपने अहंकार को त्यागकर दूसरों के दुःख को दूर करता है, तब वह सच्चे धर्म का पालन करता है। इस भजन का संदेश यही है कि हम अपने कर्मों को शुद्ध करें, अपने मन को करुणा से भरें, और जीवन को एक जलते दीपक की तरह प्रेम और सेवा में समर्पित करें।
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