अरे वह पनघट पे बटमार गुजरिया जादू कर गई रे लिरिक्स

अरे वह पनघट पे बटमार गुजरिया जादू कर गई रे लिरिक्स


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अरे वह पनघट पे बटमार गुजरिया जादू कर गई रे |
चित में वह चितवन चुभा और बाँकी भौंह मरोड़
वह चितई चितवन चुभा और संग में भौंह मरोड़
इठला के शरमाय के वह मुसकाई मुँह मोड़
कलेजे बिजली गिर गई रे, हिया पे बिजली गिर गई रे ||
गुजरिया जादू -----
अरे वह पनघट पे ---------------------
जमुना में गागर ड़ुबा और इधर-उधर को झाँक
मेरा मन हर ले गई, अरे मेरा मन हर ले गई
और दे गई नहीं छटाँक, लूट पनिहारी कर गई रे ||
गुजरिया -----
अरे वह पनघट पे -----------------
गुण गरवीली गोरकी, अरे कुछ गरवीली गूजरी
और कुछ गागर में भार, अरे कुछ गागर में भार
झीनी कटि लट-लट करे, अरे पतली कमर लचपच करे
हे राम लगाना पार, भँवर में नैया पड़ गई रे ||
गुजरिया जादू -----

अरे वह पनघट पे -----------------
नील वरन यमुना इधर, और उधर वो गोरी नार
नीला रंग यमुना इधर, और उधर वो गोरी नार
कंचन कलसा शीश पर, अरे कंचन कलसा शीश पर
लो बनी त्रिवेणी धार, रूप की परवी पड़ गई रे ||
गुजरिया जादू -----
अरे वह पनघट पे ---------------

शब्दार्थ : बटमार = राह चलते को लूटने वाला, छटाँक = लगभग 64 ग्राम
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