मैं थारा दर आवा जी मैं भोले नू मनावा जी

मैं थारा दर आवा जी मैं भोले नू मनावा जी

मैं थारा दर आवा जी,
मैं भोले नूं मनावा जी,
तू कर बेड़ा पार मेरा,
रहेगा उपकार तेरा,
तू ही तो संसार मेरा,
मैं थारा दर आवा जी,
मैं भोले नूं मनावा जी।।

जब भी तेरे दर पे आया,
तूने गले से लगाया,
मेरे दुख, डर और भरम को,
पल में दूर भगाया,
सुन ले मेरी,
इतनी दुआ कर दे इशारा,
तू कर बेड़ा पार मेरा,
रहेगा उपकार तेरा,
तू ही तो संसार मेरा,
मैं थारा दर आवा जी,
मैं भोले नूं मनावा जी।।

उज्जैन नगरी शिप्रा तीर्थ,
जग में सबसे प्यारा,
अब क्या डरना इस दुनिया से,
जब है साथ तुम्हारा,
सुन ले मेरी,
इतनी दुआ कर दे इशारा,
तू कर बेड़ा पार मेरा,
रहेगा उपकार तेरा,
तू ही तो संसार मेरा,
मैं थारा दर आवा जी,
मैं भोले नूं मनावा जी।।

मैं थारा दर आवा जी,
मैं भोले नूं मनावा जी,
तू कर बेड़ा पार मेरा,
रहेगा उपकार तेरा,
तू ही तो संसार मेरा,
मैं थारा दर आवा जी,
मैं भोले नूं मनावा जी।।


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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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