हुकमी होवन अकार शब्द गुरू नानक देव जी
शब्द गुरू नानक देव जी
जपु गुरू नानक देव जी हुकमी होवन अकार
हुकमी होवनि आकार हुकमु न कहिआ जाई
हुकमी होवनि आकार हुकमु न कहिआ जाई ॥
हुकमी होवनि जीअ हुकमि मिलै वडिआई ॥
हुकमी उतमु नीचु हुकमि लिखि दुख सुख पाईअहि ॥
इकना हुकमी बखसीस इकि हुकमी सदा भवाईअहि ॥
हुकमै अंदरि सभु को बाहरि हुकम न कोइ ॥
नानक हुकमै जे बुझै त हउमै कहै न कोइ
Japu Guroo Naanak Dev Jee
Hukamee Hovan Akaar
Hukamee Hovani Aakaar Hukamu Na Kahia Jaee
Hukamee Hovani Aakaar Hukamu Na Kahia Jaee .
Hukamee Hovani Jee Hukami Milai Vadiaee .
Hukamee Utamu Neechu Hukami Likhi Dukh Sukh Paeeahi .
Ikana Hukamee Bakhasees Iki Hukamee Sada Bhavaeeahi .
Hukamai Andari Sabhu Ko Baahari Hukam Na Koi .
Naanak Hukamai Je Bujhai Ta Haumai Kahai Na Koi
Hukamee Hovan Akaar
Hukamee Hovani Aakaar Hukamu Na Kahia Jaee
Hukamee Hovani Aakaar Hukamu Na Kahia Jaee .
Hukamee Hovani Jee Hukami Milai Vadiaee .
Hukamee Utamu Neechu Hukami Likhi Dukh Sukh Paeeahi .
Ikana Hukamee Bakhasees Iki Hukamee Sada Bhavaeeahi .
Hukamai Andari Sabhu Ko Baahari Hukam Na Koi .
Naanak Hukamai Je Bujhai Ta Haumai Kahai Na Koi
2. गुरबानी पौड़ी 2 : हुकमी होवन अकार (जपुजी साहिब अर्थसहित पाठ) W/meaning in English & Hindi
सृष्टि का हर रूप, हर जीव, हर घटना एक अनंत विधान के अधीन है। यह विधान न तो पूर्णतः कहा जा सकता है, न ही समझा जा सकता है। जीवों का होना, उनकी महानता, ऊँच-नीच, सुख-दुख, सभी इस विधान के तहत ही रचे जाते हैं। कोई उसकी कृपा से बख्शीश पाता है, तो कोई सदा उसमें लीन रहता है। यह समझ जीवन को सरल बनाती है कि सब कुछ उसकी मर्जी में है; बाहर कोई स्वतंत्र इच्छा नहीं।
जैसे नदी अपने मार्ग को स्वयं नहीं चुनती, बल्कि प्रकृति के नियमों से बहती है, वैसे ही मनुष्य का जीवन भी उस विधान के प्रवाह में चलता है। जब यह बोध जागता है कि सब कुछ उसकी हुकम में है, तो अहंकार का बंधन टूट जाता है। मन शांत हो जाता है, और जीवन का हर क्षण उस अनंत के साथ एकरूप होने का अवसर बन जाता है। सच्ची शांति इसी बोध में है कि स्वयं को उसकी इच्छा में समर्पित कर देना ही मुक्ति है।
जैसे नदी अपने मार्ग को स्वयं नहीं चुनती, बल्कि प्रकृति के नियमों से बहती है, वैसे ही मनुष्य का जीवन भी उस विधान के प्रवाह में चलता है। जब यह बोध जागता है कि सब कुछ उसकी हुकम में है, तो अहंकार का बंधन टूट जाता है। मन शांत हो जाता है, और जीवन का हर क्षण उस अनंत के साथ एकरूप होने का अवसर बन जाता है। सच्ची शांति इसी बोध में है कि स्वयं को उसकी इच्छा में समर्पित कर देना ही मुक्ति है।
हुकमी होवन अकार (जपुजी साहिब अर्थसहित पाठ - पौडी़ 2) W/meaning in English & Hindi