मै तो तेरा हुआ साँवरे तेरा रहूँगा भजन

मै तो तेरा हुआ साँवरे तेरा रहूँगा भजन

मै तो तेरा हुआ साँवरे तेरा रहूँगा,
तुझसे दुरी कभी भी प्रभु मै न सहूँगा,

माना मैं तेरे लायक नहीं फिर भी निभाना होगा,
प्रेम मेरा मानु मैं नया इक दिन पुराना होगा,
गुनगुनाओ कभी तेरा ही सदा होठो पे मेरा नाम आता है,
मै तो तेरा हुआ साँवरे तेरा रहूँगा

देखु मैं तुझे खाव्बो में सदा तेरे ख्यालो में खोउ,
तक्लीफो मे रोउ न कभी यादो में तेरी मैं रोउ,
पलके गिराओ तो लगता है जैसे आँखों में तू बैठा है,
मै तो तेरा हुआ साँवरे तेरा रहूँगा

तुमने अगर मुख मोड़ा तो बोलो कहा जाउगा,
दूजा घर न जानू मैं प्रभु लौट इधर आउगा,
मेरा दिल घूम हुआ हर्ष यहाँ सँवारे छुपा के रखा है,
मै तो तेरा हुआ साँवरे तेरा रहूँगा


यह भजन श्रीकृष्णजी के प्रति अनन्य प्रेम और समर्पण की गहनतम अनुभूति को दर्शाता है। यह भाव बताता है कि जब भक्त प्रभु के प्रेम में डूब जाता है, तब संसार की कोई और आकांक्षा शेष नहीं रहती—उसका संपूर्ण अस्तित्व केवल श्रीकृष्णजी के चरणों में समर्पित हो जाता है।

श्रद्धा की यह गहराई बताती है कि भले ही भक्त स्वयं को प्रभु के योग्य न मानता हो, फिर भी उसकी भक्ति और प्रेम उसे श्रीकृष्णजी से जोड़ता है। यह आत्मसमर्पण का वह स्तर है, जहाँ सांसारिक मोह समाप्त हो जाता है और केवल ईश्वर की कृपा ही सर्वोच्च आनंद का स्रोत बन जाती है।

भक्ति का यह रूप स्वप्नों में, विचारों में और जीवन की हर अनुभूति में ईश्वर की उपस्थिति को दर्शाता है। जब मनुष्य अपनी प्रत्येक भावना को श्रीकृष्णजी में समर्पित करता है, तब उसे उनकी मधुर छवि और प्रेम की अनंत अनुभूति प्राप्त होती है।
 
Next Post Previous Post