या मोहन के रूप लुभानी भजन लिरिक्स
"मैं मोहन (कृष्ण) के सुंदर रूप से मोहित हो गई हूँ। उनका सुंदर शरीर, कमल की पंखुड़ियों जैसे नेत्र, टेढ़ी चितवन और मंद मुस्कान मन को लुभाती है। यमुना के किनारे वे गायें चराते हैं और बांसुरी में मधुर धुन बजाते हैं। मैं अपने तन, मन और धन को गिरधर (कृष्ण) पर न्योछावर करती हूँ और उनके चरण कमलों से लिपटी रहती हूँ।"
इस भजन में मीरा बाई ने श्रीकृष्ण के बाल रूप और उनकी लीलाओं का सुंदर चित्रण किया है, जो भक्तों के मन में भक्ति और प्रेम की भावना जागृत करता है।
या मोहन के रूप लुभानी
या मोहन के रूप लुभानी।
सुंदर बदन कमलदल लोचन, बांकी चितवन मंद मुसकानी॥
जमना के नीरे तीरे धेनु चरावै, बंसी में गावै मीठी बानी।
तन मन धन गिरधर पर बारूं, चरणकंवल मीरा लपटानी॥
(दल=पंखुड़ी,बांकी=टेढ़ी, नीरे=निकट)
Ya Mohan Ke Roop Lubhaanee
Ya Mohan Ke Roop Lubhaanee.
Sundar Badan Kamaladal Lochan, Baankee Chitavan Mand Musakaanee.
Jamana Ke Neere Teere Dhenu Charaavai, Bansee Mein Gaavai Meethee Baanee.
Tan Man Dhan Giradhar Par Baaroon, Charanakanval Meera Lapataanee.
या मोहन की में रूप लुभानी
|
Author - Saroj Jangir
इस ब्लॉग पर आप पायेंगे मधुर और सुन्दर भजनों का संग्रह । इस ब्लॉग का उद्देश्य आपको सुन्दर भजनों के बोल उपलब्ध करवाना है। आप इस ब्लॉग पर अपने पसंद के गायक और भजन केटेगरी के भजन खोज सकते हैं....अधिक पढ़ें।
|