हो कांनां किन गूँथी जुल्फां कारियां लिरिक्स

हो कांनां किन गूँथी जुल्फां कारियां लिरिक्स

हो कांनां किन गूँथी जुल्फां कारियां मीरा भजन 
हो कांनां किन गूँथी जुल्फां कारियां।।टेक।।
सुधर कला प्रवीन हाथन सूँ, जसुमति जू ने सबारियां।
जो तुंम आओ मेरी बाखरियां, जरि राखूँ चन्दन किवारियां।
मीरां के प्रभु गिरधरनागर, इन जुलफन पर वारियां।।
 
(कांनां=कृष्ण, जुल्फां=लटें, सुधर=सुन्दर, प्रवीन=प्रवीण, निपुण, बाखरियां=मकान, जरि राखूँ=भली प्रकार बन्द करके रखूँ, वारियाँ=न्यौछावर होती हूँ)

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