देश हित पैदा हुये हैं देश पर मर जायेंगे

देश हित पैदा हुये हैं देश पर मर जायेंगे

देश हित पैदा हुये हैं देश पर मर जायेंगे
देश हित पैदा हुये हैं देश पर मर जायेंगे
मरते मरते देश को जिन्दा मगर कर जायेंगे

हमको पीसेगा फलक चक्की में अपनी कब तलक
खाक बनकर आंख में उसकी बसर हो जायेंगे

कर वही बर्गें खिगा को बादे सर सर दूर क्यों
पेशबाए फस्ले गुल है खुद समर कर जायेंगे

खाक में हम को मिलाने का तमाशा देखना
तुख्मरेजी से नये पैदा शजर कर जायेंगे

नौ नौ आंसू जो रूलाते है हमें उनके लिये
अश्क के सैलाब से बरपा हश्र कर जायेंगे

गर्दिशे गरदाब में डूबे तो परवा नहीं
बहरे हस्ती में नई पैदा लहर कर जायेंगे

क्या कुचलते है समझ कर वह हमें बर्गे हिना
अपने खूं से हाथ उनके तर बतर कर जायेंगे

नकशे पर है क्या मिटाता तू हमें पीरे फलक
रहबरी का काम देंगे जो गुजर कर जायेंगे



एक सच्चा देशभक्त अपनी धरती की रक्षा के लिए जीवन का प्रत्येक क्षण समर्पित करता है। उसका अस्तित्व केवल व्यक्तिगत सीमाओं तक नहीं रहता, बल्कि वह राष्ट्र की स्वतंत्रता, गरिमा और भविष्य को सुनिश्चित करने का संकल्प लेता है। बलिदान केवल शारीरिक समर्पण नहीं, बल्कि आत्मा का वह प्रकाश है, जो राष्ट्र को नई ऊर्जा प्रदान करता है। वीर कभी मृत्यु से भयभीत नहीं होते, बल्कि वह संघर्ष को अपने कर्तव्य के रूप में स्वीकार करते हैं। समय के थपेड़ों से भले ही धूल में मिल जाएं, किन्तु उनके विचार और समर्पण से नवीन दिशाओं का निर्माण होता है।

जिसे इतिहास मिटाने का प्रयास करता है, वह समय के साथ और भी सशक्त रूप में प्रकट होता है। राष्ट्रभक्त केवल वर्तमान में नहीं जीते, वे भविष्य की भूमि को शक्ति प्रदान करने का कार्य करते हैं। उनके आंसू क्रांति की धार बनते हैं, उनकी पीड़ा समाज के जागरण का संदेश देती है।

यहां साहस और अडिग संकल्प की गाथा अंकित है। जो राष्ट्र के प्रति सच्चा प्रेम रखते हैं, वे केवल शब्दों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि अपने कर्मों से इसकी रक्षा और उत्थान का मार्ग प्रशस्त करते हैं। मातृभूमि की सेवा ही सर्वोच्च धर्म है, और जो इस मार्ग पर अडिग रहते हैं, वे अनंत काल तक अमर हो जाते हैं।
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