यह सबब है जो हमारी वो खबर रखते

यह सबब है जो हमारी वो खबर रखते

यह सबब है जो हमारी वो खबर रखते नहीं
यह सबब है जो हमारी वो खबर रखते नहीं,
बेअसर नाले हैं कुछ ऐसा असर रखते नहीं।

ख़ान:-ए-सय्याद से उड़कर, चमन तक जाएं क्या,
हम तो अपने बाजुओं में बालो-पर रखते नहीं।

सर हथेली पर लिए हैं सरफरोशाने-वतन,
तन से जो उतरे न सर, ऐसा वो सर रखते नहीं।

इस तरह तुम हो गए हो किस लिए यूं बेखबर,
सब की रखते हो खबर मेरी खबर रखते नहीं।

बेहुनर हो कर हुए मशहूर 'बिस्मिल' किस तरह,
सच तो यह है वो कोई ऐसा हुनर रखते नहीं।



सुन्दर में गहन आत्मचिंतन और जीवन के सत्यों की अभिव्यक्ति है। इसमें अहंकार, त्याग, निष्ठा और बलिदान की भावना निहित है। जीवन में कितने ही संघर्ष क्यों न हों, सच्चा साधक न तो मोह से बंधता है और न ही सांसारिक लोभ से प्रभावित होता है। आत्मा की उड़ान तभी संभव है जब बाहरी बाधाएँ उसे रोकने का साहस न रखें।

जो जीवन को सच्चे अर्थों में जीते हैं, उनके लिए अस्तित्व मात्र भौतिक उपस्थिति नहीं है, बल्कि एक उच्च लक्ष्य की ओर अग्रसर होना है। धर्म का मार्ग केवल सुविधा और सुख प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि समर्पण, बलिदान और निःस्वार्थ भाव से कर्तव्य निभाने का मार्ग है। जब चेतना आत्मिक ऊँचाइयों को स्पर्श करती है, तब व्यक्ति स्वयं को दूसरों की अपेक्षाओं और सांसारिक पहचान से मुक्त कर लेता है।

इसमें निष्ठा और समर्पण का भाव सर्वोच्च है। केवल वही आत्माएँ सच्ची स्वतंत्रता को प्राप्त कर सकती हैं, जिनमें साहस और निष्काम कर्म की क्षमता हो। संसार में प्रसिद्धि और प्रशंसा का मूल्य तब ही सार्थक होता है, जब वह आत्मा के प्रकाश को अभिव्यक्त करे, न कि मात्र बाहरी दिखावे के लिए हो।
Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

दैनिक रोचक विषयों पर में 20 वर्षों के अनुभव के साथ, मैं एक विशेषज्ञ के रूप में रोचक जानकारियों और टिप्स साझा करती हूँ, मेरे इस ब्लॉग पर। मेरे लेखों का उद्देश्य सामान्य जानकारियों को पाठकों तक पहुंचाना है। मैंने अपने करियर में कई विषयों पर गहन शोध और लेखन किया है, जिनमें जीवन शैली और सकारात्मक सोच के साथ वास्तु भी शामिल है....अधिक पढ़ें

Next Post Previous Post