भारत जननि तेरी जय हो विजय हो

भारत जननि तेरी जय हो विजय हो

भारत जननि तेरी जय हो विजय हो
भारत जननि तेरी जय हो विजय हो ।
तू शुद्ध और बुद्ध ज्ञान की आगार,
तेरी विजय सूर्य माता उदय हो ।।

हों ज्ञान सम्पन्न जीवन सुफल होवे,
सन्तान तेरी अखिल प्रेममय हो ।।

आयें पुनः कृष्ण देखें द्शा तेरी,
सरिता सरों में भी बहता प्रणय हो ।।

सावर के संकल्प पूरण करें ईश,
विध्न और बाधा सभी का प्रलय हो ।।

गांधी रहे और तिलक फिर यहां आवें,
अरविंद, लाला महेन्द्र की जय हो ।।

तेरे लिये जेल हो स्वर्ग का द्वार,
बेड़ी की झन-झन बीणा की लय हो ।।

कहता खलल आज हिन्दू-मुसलमान,
सब मिल के गाओं जननि तेरी जय हो ।।



इस देशभक्ति गीत में भारत जननी के प्रति गहरी श्रद्धा और उनकी विजय की कामना का उदगार है। माता शुद्धता और ज्ञान की स्रोत हैं, जिनकी विजय सूर्य की तरह विश्व को आलोकित करे। जैसे गंगा का प्रवाह पवित्रता लाता है, वैसे ही उनकी संतान प्रेम और ज्ञान से समृद्ध हो।

श्रीकृष्णजी की तरह पुनः कोई महान आत्मा भारत की दशा देखने आए, और सरिताओं में प्रेम बहे। गांधी, तिलक, अरविंद, और लाला जैसे वीरों की प्रेरणा से संकल्प पूरे हों, और हर बाधा नष्ट हो। जेल स्वर्ग का द्वार बने, और बेड़ियों की झंकार वीणा की लय। हिंदू-मुसलमान का भेद मिटे, और सब मिलकर माता की जय गाएं। यह भाव आत्मा को प्रेरित करता है कि एकता, प्रेम, और समर्पण से भारत की शान और शांति अक्षुण्ण रहे।
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