श्री संणु जी की आरती
श्री संणु जी की आरती
धूप दीप घुत साजि आरती |वारने जाउ कमलापति || १ ||
मंगलाहरि मंगला |
नित मंगल राजा राम राई को ||
रहउ०उत्तम दियरा निरमल बाती |
तुही निरंजन कमला पाती |
रामा भगति रामानंदु जानै |
पूरन परमानन्द बखानै |
मदन मूरति भै तारि गोबिन्दे |
सैणु भणै भजु परमानन्दे |
धूप दीप घुत साजि आरती।
वारने जाउ कमलापति।
मंगलाहरि मंगला।
नित मंगल राजा राम राई को।
उत्तम दियरा निरमल बाती।
तुही निरंजन कमला पाती।
रामा भगति रामानंदु जानै।
पूरन परमानन्द बखानै।
मदन मूरति भै तारि गोबिन्दे।
सैणु भणै भजु परमानन्दे।
सुन्दर भजन में श्रीसैणुजी की आराधना का उदगार है। धूप, दीप और पुष्पों से सजी इस आरती में भक्त अपना सम्पूर्ण भाव अर्पित करते हैं। भक्ति की इस प्रगाढ़ अनुभूति में हृदय में पवित्रता और आनंद का संचार होता है।
श्रीसैणुजी की स्तुति में आत्मा का प्रकाश और शुद्धता का अनुभव होता है। कमलापति के चरणों में समर्पण से मनोबल और श्रद्धा की वृद्धि होती है। यह आरती सतत मंगल का प्रतीक है, जिसमें हर क्षण श्रीरामजी की अनुकम्पा का आह्वान किया जाता है।
श्रीसैणुजी का निरंजन स्वरूप दिव्यता और ज्ञान का प्रतीक है। उनके ध्यान में तन्मय होने से चेतना में निर्मलता आती है और भक्त को आत्मा के सत्य का बोध होता है। भक्तजन जानते हैं कि श्रीरामजी की भक्ति में रमने से पूर्ण आनंद की अनुभूति होती है। रामानंदजी के सान्निध्य में यह भक्ति और भी गहन हो जाती है।
इस आरती में श्रीसैणुजी के रूप की मधुर व्याख्या होती है। उनकी उपासना से मन भक्तिमय उल्लास से भर जाता है। श्रीगोबिन्दजी के स्मरण से भक्तजनों का उद्धार होता है और जीवन में सार्थकता का संचार होता है। भजन में श्रीसैणुजी को स्मरण कर परमानंद की प्राप्ति का संदेश दिया गया है। आरती के मधुर स्वर से हृदय में श्रद्धा और भक्ति का भाव जागृत होता है। श्रीसैणुजी के चरणों में समर्पण से हर मन शांत और मंगलमय होता है।
श्रीसैणुजी की स्तुति में आत्मा का प्रकाश और शुद्धता का अनुभव होता है। कमलापति के चरणों में समर्पण से मनोबल और श्रद्धा की वृद्धि होती है। यह आरती सतत मंगल का प्रतीक है, जिसमें हर क्षण श्रीरामजी की अनुकम्पा का आह्वान किया जाता है।
श्रीसैणुजी का निरंजन स्वरूप दिव्यता और ज्ञान का प्रतीक है। उनके ध्यान में तन्मय होने से चेतना में निर्मलता आती है और भक्त को आत्मा के सत्य का बोध होता है। भक्तजन जानते हैं कि श्रीरामजी की भक्ति में रमने से पूर्ण आनंद की अनुभूति होती है। रामानंदजी के सान्निध्य में यह भक्ति और भी गहन हो जाती है।
इस आरती में श्रीसैणुजी के रूप की मधुर व्याख्या होती है। उनकी उपासना से मन भक्तिमय उल्लास से भर जाता है। श्रीगोबिन्दजी के स्मरण से भक्तजनों का उद्धार होता है और जीवन में सार्थकता का संचार होता है। भजन में श्रीसैणुजी को स्मरण कर परमानंद की प्राप्ति का संदेश दिया गया है। आरती के मधुर स्वर से हृदय में श्रद्धा और भक्ति का भाव जागृत होता है। श्रीसैणुजी के चरणों में समर्पण से हर मन शांत और मंगलमय होता है।