आया शरण मै तेरी सांवरे भजन
आया शरण मै तेरी सांवरे भजन
पकड़ो कलाही मेरी सांवरे,
दुनिया ने मारी ऐसी ठोकर,
आया शरण में सब कुछ खो कर,
अब तो उठा कर शरण लगा ले,
करता क्यों देरी अब तू सांवरे,
आया शरण मै तेरी सांवरे,
दुनिया में सारे मतलब वाले,
तन सबके उजले पर मन है काले,
माया का बंधन छुड़ा करके बाबा,
लेले शरण में तेरी सांवरे,
आया शरण मै तेरी सांवरे,
बीच भंवर में नोका फसी है,
पार लगा दे क्या बेरुखी है,
मीरा की बहिया बन जा तू बाबा,
पतवार मेरी तू ले सांवरे,
आया शरण मै तेरी सांवरे,
घेरे हैं मुझको गम के अँधेरे,
घबराए बिन न सूझे सवेरे,
रोशन तू करदे सारे अँधेरे,
यही तमन्ना मेरी सांवरे,
आया शरण मै तेरी सांवरे,
श्याम प्यारे खाटू वाले,
भजन सुन कर दिल खुश हो जायेगा | आया शरण मै तेरी सांवरे | shyam khatu hit amit bansal hanumangarh
जीवन की इस यात्रा में जब मनुष्य संसार की ठोकरों से थक जाता है और माया के बंधनों में उलझकर अपने आप को असहाय पाता है, तब वह सच्ची शरण केवल उस परम कृपालु के चरणों में ही पाता है। सांवरिया का वह प्रेममय दरबार ऐसा आश्रय है, जहाँ हर दुखी और टूटा हुआ हृदय अपनी पीड़ा को भूलकर शांति और आनंद की अनुभूति करता है। यह संसार भले ही मतलबी रिश्तों और काले मन वालों से भरा हो, परंतु सांवरे की शरण में आने वाला प्रत्येक भक्त उस माया के जाल से मुक्त हो जाता है। उनकी कृपा ऐसी है, जो भक्त के जीवन की हर निराशा को आशा में, हर अंधेरे को उजाले में बदल देती है। यह शरण वह पवित्र स्थान है, जहाँ भक्त अपने सारे दुख और भय को सौंपकर, प्रभु के प्रेम में लीन हो जाता है और अपने जीवन को एक नई दिशा प्राप्त करता है।
सांवरिया की वह दयालु नजर और करुणामयी मुस्कान हर भक्त की नाव को भवसागर के बीच भंवर से पार लगाती है। जब जीवन की नौका तूफानों में फंस जाती है, तब केवल वही पतवार बनकर भक्त को सही मार्ग दिखाते हैं। उनकी भक्ति में डूबा हुआ व्यक्ति न केवल अपने गम के अंधेरों से मुक्ति पाता है, बल्कि उसके हृदय में एक ऐसी ज्योति प्रज्वलित होती है, जो उसे सदा के लिए प्रभु के प्रेम और विश्वास से जोड़े रखती है। यह सांवरे का वह आलौकिक प्रेम है, जो मीरा की भाँति भक्त को अपने प्रभु में पूर्णतः समर्पित कर देता है, और उसे यह विश्वास दिलाता है कि कोई भी संकट इतना बड़ा नहीं, जो सांवरे की कृपा के सामने टिक सके। इस प्रकार, उनकी शरण में आकर भक्त न केवल अपने जीवन को उज्ज्वल बनाता है, बल्कि उस अनंत प्रेम और कृपा का हिस्सा बन जाता है, जो सदा उसके साथ रहता है।
ईश्वर का सौंदर्य केवल बाहरी रूप में नहीं, बल्कि उसके गुण, करुणा और प्रेम में है। सांवरे रूप में भगवान कृष्ण को प्रेम, दया, करुणा और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। भक्तों का विश्वास है कि सांवरे कृष्ण के प्रति सच्ची श्रद्धा और भक्ति से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और मन को शांति, प्रेम और आध्यात्मिक आनंद की प्राप्ति होती है।
खाटू श्याम जी, जिन्हें कलियुग के सांवरे या श्याम बाबा भी कहा जाता है, उनके भी सांवरे रूप की पूजा होती है, और यह मान्यता है कि वे अपने भक्तों के दुख दूर करते हैं और उन्हें आश्रय देते हैं। इस प्रकार, "सांवरे" शब्द न केवल भगवान कृष्ण के स्वरूप का वर्णन करता है, बल्कि भक्त और भगवान के बीच के प्रेम और आस्था की गहराई को भी दर्शाता है।
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