जब जब भी बाबा तेरे नैनो से नैन मिलाए भजन
जब जब भी बाबा तेरे नैनो से नैन मिलाए भजन
जब जब भी बाबा तेरे,नैनो से नैन मिलाए,
नैना मेरे भर आए,
नैना मेरे भर आये।
याद करूँ मैं मेरा बीता ज़माना,
कोई नहीं था बाबा मेरा ठिकाना,
दर दर की लाखों मैंने ठोकर थी खायी,
दर दर की लाखो मैंने ठोकर थी खायी,
क़िस्मत मेरी तेरे दर पे ले आई,
बाहें फैला के मुझको,
अपने गले से लगाए,
नैनां मेरे भर आए,
नैना मेरे भर आये।
जिस दिन से थामा बाबा हाथ ये मेरा,
दूर हुआ जीवन का अँधेरा,
खुशियां ही खुशियां मेरे जीवन में आई,
खुशियां ही खुशियां मेरे जीवन में आई,
संग संग में रहता मेरे ज्यूँ परछाई,
जान गया कैसे तू,
हारे को जित दिलाए,
नैनां मेरे भर आए,
नैना मेरे भर आये।
रिश्ता बनाया है तो साथ निभाना,
अपने बेटे को दिल से ना भूलाना,
श्याम की बाबा बस ये ही तमन्ना,
श्याम की बाबा बस ये ही तमन्ना,
किरपा तुम्हारी कभी मुझपे हो कम ना,
दिल की ये बातें अपने,
दिलबर को जब बतलाएं,
नैनां मेरे भर आए,
नैना मेरे भर आये।
जब जब भी बाबा तेरे,
नैनो से नैन मिलाए,
नैना मेरे भर आए,
नैना मेरे भर आये।
जब जब भी बाबा तेरे नैनो से नैन मिलाये | अंजलि द्विवेदी जी
जब बाबा के नैन साधक के नैनों से मिलते हैं, तो आँसू भर आते हैं, दिल सुकून से भर जाता। बीते ज़माने की दर-दर ठोकरें याद आतीं, कोई ठिकाना न था, बस किस्मत ने खींचकर उनके दर पर ला खड़ा किया। बाहें फैलाकर गले लगा लिया, अँधेरा छँट गया। जीवन में खुशियाँ घिर आईं, परछाईं सा संग साथ निभाने लगे। हारे को जित दिलाते, रिश्ता निभाने की तमन्ना जगा दी। हमें दिखाते हैं कि इश्वर का आशीर्वाद हर ठोकर को आलिंगन में बदल देता।
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Author - Saroj Jangir
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