देखत राम हंसे सुदामाकूं देखत राम भजन

देखत राम हंसे सुदामाकूं देखत राम भजन

देखत राम हंसे सुदामा कूं देखत राम हंसे।।
फाटी तो फूलडियां पांव उभाणे चरण घसे।
बालपणेका मिंत सुदामां अब क्यूं दूर बसे।।
कहा भावजने भेंट पठाई तांदुल तीन पसे।
कित ग प्रभु मोरी टूटी टपरिया हीरा मोती लाल कसे।।
कित ग प्रभु मोरी गौन बछिया द्वारा बिच हसती फसे।
मीराके प्रभु हरि अबिनासी सरणे तोरे बसे।।


कुमाऊनी होली सुदामा जी को देखत राम हँसे
 
मीराबाई की यह भक्ति रचना सुदामा-कृष्ण की लीला पर आधारित है, जहाँ गरीब ब्राह्मण सुदामा अपने बालसखा भगवान कृष्ण से मिलने जाते हैं। देखत राम हंसे सुदामा कूं देखत राम हंसे॥ फाटी तो फूलडियां पांव उभाणे चरण घसे॥ बालपणेका मिंत सुदामां अब क्यूं दूर बसे॥ कहा भावजने भेंट पठाई तांदुल तीन पसे॥ 
 
कित ग प्रभु मोरी टूटी टपरिया हीरा मोती लाल कसे॥ कित ग प्रभु मोरी गौन बछिया द्वारा बिच हसती फसे॥ मीराके प्रभु हरि अबिनासी सरणे तोरे बसे॥। इस पद में मीरा भगवान के दर्शन से सुदामा के दुखों के निवारण का वर्णन करती हैं—रमणीय श्रीराम (कृष्ण) सुदामा को देख हँसते हैं, उनके फटे वस्त्र फूलों जैसे हो जाते हैं, चरणों की धूल उभर आती है। बचपन के मित्र को दूर क्यों बसने दिया, श्याला ने भेंट में थोड़े चावल भेजे, फिर प्रभु ने टूटी झोपड़ी को हीरे-मोती से सजाया, गौ-बछिया के बीच हँसती गोपी फँसी। मीरा कहती हैं, हे अविनाशी हरि, हम तेरी शरण में बसते हैं। यह भक्ति भाव से परिपूर्ण पद भगवान की कृपा और भक्त-प्रेम को दर्शाता है।
 
Provided to YouTube by Worldwide Records
Dekhat Ram Hase Sudama Ko · Soumya
Meera
℗ Worldwide Records
Released on: 2014-08-04
Composer: Pradyuman Sharma
Lyricist: Meera Bai 
Next Post Previous Post