हेरी सखी देख्योरी नंद किशोर
हेरी सखी देख्योरी नंद किशोर
मोर मुकुट मकराकृत कुंडल। पीतांबर झलक हरोल
ग्वाल बाल सब संग जुलीने। गोवर्धनकी और
मीराके प्रभु गिरिधर नागर। हरि भये माखन चोर
Heree Sakhee Dekhyoree Nand Kishor
Mor Mukut Makaraakrt Kundal. Peetaambar Jhalak Harol
Gvaal Baal Sab Sang Juleene. Govardhanakee Aur
Meeraake Prabhu Giridhar Naagar. Hari Bhaye Maakhan Chor
इस संसार से सभी वैभव छोड़कर मीरा ने श्री कृष्ण को ही अपना सब कुछ माना। राजसी ठाठ बाठ छोड़कर मीरा कृष्ण भक्ति और वैराग्य में अपना वक़्त बिताती हैं। भक्ति की ये अनूठी मिशाल है। मीरा के पदों में आध्यात्मिक अनुभूति है और इनमे दिए गए सन्देश अमूल्य हैं। मीरा के साहित्य में राजस्थानी भाषा का पुट है और इन्हे ज्यादातर ब्रिज भाषा में रचा गया है।
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