तेरा पल पल बीता जाए मुख से जपले भजन
तेरा पल पल बीता जाए मुख से जप ले नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय॥
शिव शिव तुम हृदय से बोलो,
मन मंदिर का परदा खोलो
अवसर खाली ना जाए,
मुख से जप ले नमः शिवाय
यह दुनिया पंछी का मेला.
समझो उड़ जाना है अकेला
तेरा तन यह साथ न जाय,
मुख से जप ले नमः शिवाय
मुसाफिरी जब पूरी होगी,
चलने की मजबूरी होगी।
तेरा बिगड़ा प्राण रह जाये,
मुख से जप ले नमः शिवाय
शिव पूजन में मस्त बने जा
भक्ति सुधा रस पान किये जा
दर्शन विश्वनाथ के पाय,
मुख से जप ले नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय॥
शिव शिव तुम हृदय से बोलो,
मन मंदिर का परदा खोलो
अवसर खाली ना जाए,
मुख से जप ले नमः शिवाय
यह दुनिया पंछी का मेला.
समझो उड़ जाना है अकेला
तेरा तन यह साथ न जाय,
मुख से जप ले नमः शिवाय
मुसाफिरी जब पूरी होगी,
चलने की मजबूरी होगी।
तेरा बिगड़ा प्राण रह जाये,
मुख से जप ले नमः शिवाय
शिव पूजन में मस्त बने जा
भक्ति सुधा रस पान किये जा
दर्शन विश्वनाथ के पाय,
मुख से जप ले नमः शिवाय
Tera pal pal bitha jaye mukh se jap le namah sivay shyamjha&party
जीवन हर क्षण बहता नदी की धारा-सा है, जहाँ साँसें गिनती भर की मेहमान हैं। हृदय के गहन कोने में बसी उस अनंत शक्ति को जागृत करो, जो बाहरी आवरण हटाकर आंतरिक प्रकाश भर देती है। हर पल व्यर्थ न जाने दो, क्योंकि समय का बहाव लौटकर नहीं आता—उसकी लय में शिव नाम का संगीत बसा लो। यह संसार रंग-बिरंगे परिंदों का एक क्षणिक जमावड़ा मात्र है, जहाँ प्रत्येक प्राणी अपना अलग पंख फैलाकर उड़ान भरता है। समझ लो कि तन का यह बंधन अस्थायी है, यात्रा के अंत में अकेले ही निकलना पड़ेगा। नाम जपकर उस साथी को ग्रहण करो जो कभी अलग न होगा।
Singer : Shyam Jha
Dholak : Harish Dixit
Tabla : Nilesh
Pad : Bhola Giri
Chorus : Master Nilesh
जब मुसाफिरी का अंतिम पड़ाव आ धमकेगा, तो सब कुछ छूटने की मजबूरी घेर लेगी। प्राण का यह बिखरा तार अगर संभल जाए, तो अमर पदवी मिल जाएगी। नाम की सरिता में डूब जाओ, ताकि परलोक का द्वार सहज खुल जाए। शिव आराधना में पूरी तरह लीन हो जाओ, भक्ति के अमृत-रस को हृदय में पिया चला जाओ। उस विश्वनाथ के चरणों का दर्शन पाकर जीवन धन्य हो जाए। हर साँस में नाम का गुंजन हो, ताकि मोक्ष का मार्ग प्रशस्त हो।
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