मेरे श्याम तेरी बंसी करे कमाल
बदन में न्यारी उमंग जगाय
जब जब बाजे तेरी बंसुरिया
भागी आऊ उसी डगरिया
मेरे श्याम कर देती दिल में घात
फिर मैंने कुछ नहीं सुहाव
मेरे श्याम तेरी बंसी करे कमाल
बदन में न्यारी उमंग जगाय
मुरली की धुन दिल में खटकती
मिलने को मैं फिरू भटकती
मेरे श्याम हो जाती सुन के निहाल
मेरे श्याम तेरी बंसी करे कमाल
बदन में न्यारी उमंग जगाय
छोड़ दे कान्हा बंसी बजानी
हो गयी दुनिया तेरी दीवानी
मेरे श्याम तेरी बंसी करे कमाल
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