उठ जाग मुसाफिर भोर भई अब रैन कहाँ भजन

उठ जाग मुसाफिर भोर भई अब रैन कहाँ भजन

 
उठ जाग मुसाफिर भोर भई लिरिक्स Uth Jaag Musafir Bhor Lyrics

उठ जाग मुसाफिर भोर भई
अब रैन कहाँ जो सोवत है
जो सोवत है वो खोवत है
जो जागत है वो पावत है
उठ नींद से अँखियाँ खोल ज़रा
और अपने प्रभु से ध्यान लगा
ये प्रीत करन की रीत नहीं
ये प्रीत करन की रीत नहीं
प्रभु जागत है तू सोवत है
उठ जाग मुसाफिर भोर भई
अब रैन कहाँ जो सोवत है
जो कल करना है आज करले
जो आज करे सो अब करले
अब पछताये का होवत है
जब चिड़िया ने चुग खेत लिया
जब चिड़िया ने चुग खेत लिया
उठ जाग मुसाफिर भोर भई
अब रैन कहाँ जो सोवत है



उठ जाग मुसाफिर भोर भई अब रैन कहा जो सोवत है : सत्संगी भजन :Uth Jaag Musafir Bhor Bhai

Song - Uth Jaag Musafir Bhor Bhayi Bhajan
Artist - Neelkamal
Singer - Meenakshi Mukesh
Music - Rinku Gujral
Lyrics & Composer - Traditional
Editing - KV Sain
Label - Fine Digital Video
Copyright - Fine Digital Media
Special Thanks To All Team

भोर की पहली किरण आते ही जीवन का सफर फिर शुरू हो जाता है। नींद में खोना मतलब मौके हाथ से निकलना, जबकि जागना ही वो रास्ता है जो सब कुछ दिला देता। प्रभु तो सदा सजग हैं, बस हमें आंखें खोलनी हैं, ध्यान लगाना है—ये प्रेम की सच्ची राह है। कल का इंतजार छोड़ो, आज ही हर काम थाम लो, वरना पछतावा ही हाथ लगेगा जब सब उड़न चला जाए।

ये जगत तो चंचल है, चिड़िया की तरह खेत साफ कर देता है। उठो मुसाफिर, अभी वक्त है प्रभु को याद करने का, कर्म बांधने का। रोज सुबह ये जागरण दिल को झकझोर देता है, जीवन नई उमंग से भर जाता है। बस इतना कर लो, प्रभु का साथ हमेशा रहेगा, रास्ता रोशन हो जाएगा।
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