बन्ना रे बागां में झुला डाल्या राजस्थानी सोंग

बन्ना रे बागां में झुला डाल्या राजस्थानी सोंग

 
बन्ना रे बागां में झुला डाल्या लिरिक्स Banna Re Baga Me Jhula Dalya Lyrics

बन्ना रे बागां में झुला डाल्या
बन्ना रे बागां में झुला डाल्या
म्हारी बन्नी ने
म्हारी लाडी ने
म्हारी बन्नी ने झूलण दीज्यो
बन्ना गेंन गजरा
म्हारी लाडी ने हिंडण दीज्यो
बन्ना गेंन गजरा

बन्ना रे बागां में झुला डाल्या
बन्ना रे बागां में हिड्या डाल्या
म्हारी बन्नी ने
म्हारी लाडी ने
म्हारी बन्नी ने झूलण दीज्यो
बन्ना गेंन गजरा
म्हारी लाडी ने हिंडण दीज्यो
बन्ना गेंन गजरा

बन्ना रे जैपुरिया थे ज्याई ज्यो
बन्ना रे जैपुरिया थे ज्याई ज्यो
म्हारी बन्नी रे
म्हारी लाडी रे
म्हारी बन्नी रे रखड़ी रे ल्या ज्यो
बन्ना गेंन गजरा
म्हारी लाडी रे रखड़ी ल्या ज्यो
बन्ना रेबागां में झुला डाल्या
बन्ना रे बागां में हिड्या डाल्या
म्हारी बन्नी ने
म्हारी लाडी ने
म्हारी बन्नी ने झूलण दीज्यो
बन्ना गेंन गजरा
म्हारी लाडी ने हिंडण दीज्यो
बन्ना गेंन गजरा

बन्ना रे कोटा बूंदी जाई ज्यो
बन्ना रे कोटा बूंदी जाई ज्यो
म्हारी बन्नी रे
म्हारी लाडी रे
म्हारी बन्नी रे लहरियों ल्याई ज्यो
बन्ना गेंन गजरा
म्हारी लाडी रे लहरियों ल्याई ज्यो
बन्ना गेंन गजरा
बन्ना रेबागां में झुला डाल्या
बन्ना रे बागां में हिड्या डाल्या
म्हारी बन्नी ने
म्हारी लाडी ने
म्हारी बन्नी ने झूलण दीज्यो
बन्ना गेंन गजरा
म्हारी लाडी ने हिंडण दीज्यो
बन्ना गेंन गजरा

बन्ना रे चूड़ी घर रे ज्याई ज्यो
बन्ना रे चूड़ी घर रे ज्याई ज्यो
म्हारी बन्नी रे
म्हारी लाडी रे
म्हारी बन्नी रे चुड़लो ल्याई ज्यो
बन्ना गेंन गजरा
म्हारी लाडी रे चुड़लो ल्याई ज्यो
बन्ना गेंन गजरा
बन्ना रे बागां में झुला डाल्या
बन्ना रे बागां में हिड्या डाल्या
म्हारी बन्नी ने
म्हारी लाडी ने
म्हारी बन्नी ने झूलण दीज्यो
बन्ना गेंन गजरा
म्हारी लाडी ने हिंडण दीज्यो
बन्ना गेंन गजरा 


Banna Re Bagan Me Jhula Dalya | Ghoomar Dance | Seema Mishra | All Time Superhit Original Rajasthani

यह पारंपरिक राजस्थानी लोक गीत 'बन्ना-बन्नी' के रूप में प्रसिद्ध है, जो मुख्य रूप से विवाह के उत्सवों के दौरान गाया जाता है। इस गीत के पहले भाग में दूल्हे (बन्ना) से अनुरोध किया जा रहा है कि उसने जो बागों में झूले डाले हैं, उन पर वह अपनी दुल्हन (बन्नी/लाडी) को प्रेम और सम्मान के साथ झूलने दे। यहाँ 'गेंन गजरा' जैसे शब्द मधुर संबंधों और खुशहाली का प्रतीक हैं, जो दर्शाते हैं कि विवाह के बाद दुल्हन का स्वागत एक आनंदमय और सुरक्षित वातावरण में किया जा रहा है जहाँ उसकी खुशियों का पूरा ध्यान रखा जाता है।

गीत के दूसरे भाग में सांस्कृतिक परंपराओं और श्रृंगार का सुंदर वर्णन मिलता है, जिसमें बन्ना को अलग-अलग शहरों जैसे जयपुर, कोटा और बूंदी जाकर अपनी दुल्हन के लिए विशेष उपहार लाने को कहा गया है। जयपुर से सुहाग का प्रतीक 'रखड़ी', कोटा-बूंदी से राजस्थानी संस्कृति की पहचान 'लहरिया' (ओढ़नी) और चूड़ी घर से सुंदर 'चूड़ियाँ' लाने की बात कही गई है। यह गीत न केवल पति-पत्नी के बीच के स्नेह को दर्शाता है, बल्कि राजस्थान की समृद्ध विरासत, पहनावे और लोक जीवन की उस मिठास को भी उजागर करता है जहाँ उपहारों के माध्यम से रिश्तों को और भी गहरा बनाया जाता है।
 
Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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