किण संग करां स्नेह नित नित नवलो नेह
पान पड़ंते यूं कह्यो
कि सुन तरुवर बनराय
अब के बिछड़े कब मिलें
दूर पड़ेंगे जाय
तो आग लगी इस वृक्ष को
और जलन लगे सब पात
तुम क्यों जलो पंखेरुओं
पंख तुम्हारे पास
फल फुल खादे इस वृक्ष के
और बीट पड़ी है पात
उड़ना हमारा धर्म नहीं
और जलना वृक्ष, के साथ
हेलिए किण संग करां मैं स्नेह
संगत कीजो धरमी साध री
संगत कीजो निर्मळ साध री
बांस उगो इना बाग़ मां,
थरक रही बन राय
आप जले औरन के जाले,
अग्नि घणी अंग मांय
किण संग करां स्नेह
चंदन उगो इना बाग़ मां,
हरख रही बन राय
चंदन पास मैं जाऊं,
आप चंदन हुई जाऊं
किण संग करां स्नेह
दव लागो इना बाग़ मां,
पंछी बैठो आये
हम जले पंख बहीरो,
तम उड़ी परे को जाए
किण संग करां स्नेह
फल खादा पान बिरोड़िया,
रमिया डालो डाल
तम जलो मैं उभरूं,
जीवनो कितरीक बार
किण संग करां स्नेह
दव बुझ्यो झाड़ा मेटिया, दूधे बूठा मेह
कहत कबीरा धर्मिदास से,
नित नित नवलो नेह
किण संग करां स्नेह।
कि सुन तरुवर बनराय
अब के बिछड़े कब मिलें
दूर पड़ेंगे जाय
तो आग लगी इस वृक्ष को
और जलन लगे सब पात
तुम क्यों जलो पंखेरुओं
पंख तुम्हारे पास
फल फुल खादे इस वृक्ष के
और बीट पड़ी है पात
उड़ना हमारा धर्म नहीं
और जलना वृक्ष, के साथ
हेलिए किण संग करां मैं स्नेह
संगत कीजो धरमी साध री
संगत कीजो निर्मळ साध री
बांस उगो इना बाग़ मां,
थरक रही बन राय
आप जले औरन के जाले,
अग्नि घणी अंग मांय
किण संग करां स्नेह
चंदन उगो इना बाग़ मां,
हरख रही बन राय
चंदन पास मैं जाऊं,
आप चंदन हुई जाऊं
किण संग करां स्नेह
दव लागो इना बाग़ मां,
पंछी बैठो आये
हम जले पंख बहीरो,
तम उड़ी परे को जाए
किण संग करां स्नेह
फल खादा पान बिरोड़िया,
रमिया डालो डाल
तम जलो मैं उभरूं,
जीवनो कितरीक बार
किण संग करां स्नेह
दव बुझ्यो झाड़ा मेटिया, दूधे बूठा मेह
कहत कबीरा धर्मिदास से,
नित नित नवलो नेह
किण संग करां स्नेह।
हरख रही बन राय
चंदन पास मैं जाऊं,
आप चंदन हुई जाऊं
किण संग करां स्नेह
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