क्या भरोसा है इस ज़िंदगी का
क्या भरोसा है इस ज़िंदगी का
साथ देती नहीं यह किसी का
माल दौलत ये तेरी जवानी,
चार दिन की है बस जिंदगानी,
माल दौलत ये तेरी जवानी,
चार दिन की है बस जिंदगानी,
हक़ किया कर अदा बंदगी का,
क्या भरोसा है इस ज़िंदगी का
साथ देती नहीं यह किसी का
भूल गया ओकात को अपनी,
खोकर के मस्ती धन की,
तू ये समझता है की रहेगी,
सदा बहारे जीवन की,
मौत सिकंदर को जब आयी,
तो क्या लेकर साथ गया,
जितने वाला दुनिया को,
दुनिया से खाली हाथ गया,
छोड़कर तुझको सबकुछ है जाना,
कब्र है तेरा आखिर ठिकाना,
छोड़कर तुझको सबकुछ है जाना,
कब्र है तेरा आखिर ठिकाना,
तोड़ मत भूलकर दिल किसी का,
क्या भरोसा है इस ज़िंदगी का
साथ देती नहीं यह किसी का
सांस रुक जाएगी चलते चलते
शमा बुज जाएगी जलते जलते
दम निकल जायेगा रौशनी का
क्या भरोसा है इस ज़िंदगी का
साथ देती नहीं यह किसी का
हम रहे ना मोहोबत रहेगी,
दास्ताँ अपनी दुनिया कहेगी
नाम रह जाएगा आदमी का
क्या भरोसा है इस ज़िंदगी का
साथ देती नहीं यह किसी का
दुनिया है इक हकीकत पुरानी,
चलते रहना है उसकी रवानी
फर्ज पूरा करो बंदगी का
क्या भरोसा है इस ज़िंदगी का
साथ देती नहीं यह किसी का
क्या भरोसा है इस ज़िन्दगी का || KYA BHAROSA HAI IS ZINDAGI KA || HIT CHETAWANI BHAJAN || VIDHI SHARMA
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