खाटू जाना तो बताना मुझे भी चलना है भजन
खाटू जाना तो बताना मुझे भी चलना है
मेरे मालिक मेरे दाता से मुझको मिलना है
काम धंधे घर गृहस्थी में फंस गया हूँ मै
मोह माया के दलदल मे धंस गया हूँ
जिंदगी के सभी झमेलों से निकलना है
आना जाना मेरा खाटू मे जबसे छूटा है
मेरा जीवन है निरर्थक जो बाबा रूठा है
थक चूका हूँ मे लड़खड़ा के अब सम्भलना है
देश दुनिया मे घूम आया मग़र सुकून ना मिला
श्याम प्रेमीयो सा मोहित कही जुनून ना मिला
खाटू जा के मुझे गलियों मे फिर टहलना हैं आपको ये पोस्ट पसंद आ सकती हैं
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Author - Saroj Jangir
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