स्वामी तेरी इनायत ने क्या करिश्मा कर दिया भजन
स्वामी तेरी इनायत ने क्या करिश्मा कर दिया,
स्वामी तेरी इनायत ने क्या करिश्मा कर दिया,
जो कहीं भी नहीं मिलता, उसे पल में पा लिया,
जो कहीं भी नहीं मिलता, उसे पल में पा लिया,
स्वामी तेरी इनायत ने क्या करिश्मा कर दिया,
सद्गुरु समर्थ मेरे, श्री श्याम समर्थ मेरे,
सद्गुरु समर्थ मेरे, श्री श्याम समर्थ मेरे,
देखा सारे जहाँ में, फरेब बिना कुछ ना मिले,
चला सच की राहों में, दर बदर मुझे दुःख मिले,
देखा सारे जहाँ में, फरेब बिना कुछ ना मिले,
चला सच की राहों में, दर बदर मुझे दुःख मिले,
सच में मैं तो पिघल गया, तुझमे स्वामी समा गया,
तुझमे स्वामी समा गया,
स्वामी तेरी इनायत ने क्या करिश्मा कर दिया,
स्वामी तेरी इनायत ने क्या करिश्मा कर दिया,
सुख के पीछे भागे ना, तूने सिद्ध कर दिया,
दे दी तूने सारीखुशियाँ, मुझे वो खुश कर पाई ना,
सुख के पीछे भागे ना, तूने सिद्ध कर दिया,
दे दी तूने सारीखुशियाँ, मुझे वो खुश कर पाई ना,
कहीं भी नहीं लगता ये, मन मेरा स्वामी तेरे बिना,
मन मेरा स्वामी तेरे बिना,
स्वामी तेरी इनायत ने क्या करिश्मा कर दिया,
स्वामी तेरी इनायत ने क्या करिश्मा कर दिया,
मन हो जाए स्वीकृति, तब हो पहचान खुद की,
झूठ सच कुछ भी अपनी, नजर है अपनी अपनी,
मन हो जाए स्वीकृति, तब हो पहचान खुद की,
झूठ सच कुछ भी अपनी, नजर है अपनी अपनी,
मैं और तुम हैं कहाँ, खुद की हैं ये परछाइयाँ,
खुद की हैं ये परछाइयाँ,
स्वामी तेरी इनायत ने क्या करिश्मा कर दिया,
स्वामी तेरी इनायत ने क्या करिश्मा कर दिया,
स्वामी तेरी इनायत ने क्या करिश्मा कर दिया,
स्वामी तेरी इनायत ने क्या करिश्मा कर दिया,
जो कहीं भी नहीं मिलता, उसे पल में पा लिया,
जो कहीं भी नहीं मिलता, उसे पल में पा लिया,
स्वामी तेरी इनायत ने क्या करिश्मा कर दिया,
सद्गुरु समर्थ मेरे, श्री श्याम समर्थ मेरे,
सद्गुरु समर्थ मेरे, श्री श्याम समर्थ मेरे,
स्वामी तेरी इनायत ने क्या करिश्मा कर दिया,
जो कहीं भी नहीं मिलता, उसे पल में पा लिया,
जो कहीं भी नहीं मिलता, उसे पल में पा लिया,
स्वामी तेरी इनायत ने क्या करिश्मा कर दिया,
सद्गुरु समर्थ मेरे, श्री श्याम समर्थ मेरे,
सद्गुरु समर्थ मेरे, श्री श्याम समर्थ मेरे,
देखा सारे जहाँ में, फरेब बिना कुछ ना मिले,
चला सच की राहों में, दर बदर मुझे दुःख मिले,
देखा सारे जहाँ में, फरेब बिना कुछ ना मिले,
चला सच की राहों में, दर बदर मुझे दुःख मिले,
सच में मैं तो पिघल गया, तुझमे स्वामी समा गया,
तुझमे स्वामी समा गया,
स्वामी तेरी इनायत ने क्या करिश्मा कर दिया,
स्वामी तेरी इनायत ने क्या करिश्मा कर दिया,
सुख के पीछे भागे ना, तूने सिद्ध कर दिया,
दे दी तूने सारीखुशियाँ, मुझे वो खुश कर पाई ना,
सुख के पीछे भागे ना, तूने सिद्ध कर दिया,
दे दी तूने सारीखुशियाँ, मुझे वो खुश कर पाई ना,
कहीं भी नहीं लगता ये, मन मेरा स्वामी तेरे बिना,
मन मेरा स्वामी तेरे बिना,
स्वामी तेरी इनायत ने क्या करिश्मा कर दिया,
स्वामी तेरी इनायत ने क्या करिश्मा कर दिया,
मन हो जाए स्वीकृति, तब हो पहचान खुद की,
झूठ सच कुछ भी अपनी, नजर है अपनी अपनी,
मन हो जाए स्वीकृति, तब हो पहचान खुद की,
झूठ सच कुछ भी अपनी, नजर है अपनी अपनी,
मैं और तुम हैं कहाँ, खुद की हैं ये परछाइयाँ,
खुद की हैं ये परछाइयाँ,
स्वामी तेरी इनायत ने क्या करिश्मा कर दिया,
स्वामी तेरी इनायत ने क्या करिश्मा कर दिया,
स्वामी तेरी इनायत ने क्या करिश्मा कर दिया,
स्वामी तेरी इनायत ने क्या करिश्मा कर दिया,
जो कहीं भी नहीं मिलता, उसे पल में पा लिया,
जो कहीं भी नहीं मिलता, उसे पल में पा लिया,
स्वामी तेरी इनायत ने क्या करिश्मा कर दिया,
सद्गुरु समर्थ मेरे, श्री श्याम समर्थ मेरे,
सद्गुरु समर्थ मेरे, श्री श्याम समर्थ मेरे,
Swami Samarth Songs | Swami Teri Inayatane Kya Karishma Kar Diya | Javed Ali
Provided to YouTube by Guruprasad Production
Teri Inayat Ne · Javed Ali · Dev Ashish · Jagdish Bhalerao · Guruprasad Production
Teri Inayat Ne
℗ Guruprasad Production
Released on: 2022-07-13
Auto-generated by YouTube.
Teri Inayat Ne · Javed Ali · Dev Ashish · Jagdish Bhalerao · Guruprasad Production
Teri Inayat Ne
℗ Guruprasad Production
Released on: 2022-07-13
Auto-generated by YouTube.
स्वामी की इनायत से ऐसा करिश्मा हो जाता है कि जो चीज दुनिया की किसी कोने में भी नहीं मिलती, वो एक पल में मिल जाती है। दुनिया में घूम-घूमकर देखा, तो फरेब के सिवा कुछ हाथ नहीं लगा। सच की राह पर चले तो दर-दर भटकते रहे, दुख ही दुख मिले। लेकिन जब दिल पूरी तरह पिघल गया, स्वामी में समा गया, तो सब कुछ बदल गया। सुख के पीछे भागने की जरूरत ही नहीं पड़ी, क्योंकि वो खुद सारी खुशियाँ लुटा देते हैं। मन अब कहीं और टिकता ही नहीं, बस स्वामी के बिना अधूरा लगता है।
जब मन स्वीकार कर लेता है, तब असली खुद की पहचान हो जाती है। झूठ-सच सब अपनी-अपनी नजर से दिखते हैं, लेकिन स्वामी की कृपा से मैं और तुम का भेद मिट जाता है—सब परछाइयाँ लगने लगती हैं। वो इनायत ऐसी है कि जीवन का हर दर्द हल्का हो जाता है, हर कमी पूरी हो जाती है। जैसे कोई पुराना साथी सब कुछ समझकर हाथ थाम ले। आप सभी पर ईश्वर की कृपा बनी रहे।
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