साँचो थारो दरबार सेवक आयो थारे द्वार
साँचो थारो दरबार सेवक आयो थारे द्वार भजन
साँचो थारो दरबार, सेवक आयो थारे द्वार,
बाबा ध्यान रखना, साँचो थारो दरबार,
साँचो थारो दरबार, सेवक आयो थारे द्वार,
बाबा ध्यान रखना, सांचो थारो दरबार,
घुंम्यों सारी दुनियाँ, मिल्यों ना कोई साथी,
जो कवे अपणा, संता से सुणी है,
साँचो है एक साथी, श्री श्याम अपना,
श्री श्याम अपना, जग झूठा सपना,
साँचो थारो दरबार, सेवक आयो थारे द्वार,
बाबा ध्यान रखना, साँचो थारो दरबार,
बाबा थारो टाबर, बड़ो ही दुखियारों,
सतावे है जहाँ, थे ही मेरा सब कुछ,
पिता और माता, मैं जाऊँगा कहाँ,
मैं जाऊँगा कहाँ, बस रहूँगा यहाँ,
साँचो थारो दरबार, सेवक आयो थारे द्वार,
बाबा ध्यान रखना, साँचो थारो दरबार,
लाखां का बढाया हो, मेरा भी सवारोग़ा,
कारज जरुर, मेरी छोटी नैयाँ,
खावे है हिचकोला, ओ मेरे हजूर,
माफ़ करना क़सूर, साँचो थारो दरबार,
साँचो थारो दरबार, सेवक आयो थारे द्वार,
बाबा ध्यान रखना, साँचो थारो दरबार,
फूला से सजवा, थारी या फुलवारी,
पधारो रे घनश्याम, भग्तां बीच बेठो,
सुनो थे से के की अर्जी, जो लेवे थारो तेरा नाम,
श्री श्याम श्याम श्याम, साँचो थारो दरबार,
साँचो थारो दरबार, सेवक आयो थारे द्वार,
बाबा ध्यान रखना, साँचो थारो दरबार,
साँचो थारो दरबार, सेवक आयो थारे द्वार,
बाबा ध्यान रखना, साँचो थारो दरबार,
बाबा ध्यान रखना, साँचो थारो दरबार,
साँचो थारो दरबार, सेवक आयो थारे द्वार,
बाबा ध्यान रखना, सांचो थारो दरबार,
घुंम्यों सारी दुनियाँ, मिल्यों ना कोई साथी,
जो कवे अपणा, संता से सुणी है,
साँचो है एक साथी, श्री श्याम अपना,
श्री श्याम अपना, जग झूठा सपना,
साँचो थारो दरबार, सेवक आयो थारे द्वार,
बाबा ध्यान रखना, साँचो थारो दरबार,
बाबा थारो टाबर, बड़ो ही दुखियारों,
सतावे है जहाँ, थे ही मेरा सब कुछ,
पिता और माता, मैं जाऊँगा कहाँ,
मैं जाऊँगा कहाँ, बस रहूँगा यहाँ,
साँचो थारो दरबार, सेवक आयो थारे द्वार,
बाबा ध्यान रखना, साँचो थारो दरबार,
लाखां का बढाया हो, मेरा भी सवारोग़ा,
कारज जरुर, मेरी छोटी नैयाँ,
खावे है हिचकोला, ओ मेरे हजूर,
माफ़ करना क़सूर, साँचो थारो दरबार,
साँचो थारो दरबार, सेवक आयो थारे द्वार,
बाबा ध्यान रखना, साँचो थारो दरबार,
फूला से सजवा, थारी या फुलवारी,
पधारो रे घनश्याम, भग्तां बीच बेठो,
सुनो थे से के की अर्जी, जो लेवे थारो तेरा नाम,
श्री श्याम श्याम श्याम, साँचो थारो दरबार,
साँचो थारो दरबार, सेवक आयो थारे द्वार,
बाबा ध्यान रखना, साँचो थारो दरबार,
साँचो थारो दरबार, सेवक आयो थारे द्वार,
बाबा ध्यान रखना, साँचो थारो दरबार,
साचो थारो दरबार (Sacho tharo darbaar) by Sanju Sharma ji
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भक्त का हृदय जब श्री श्याम के सच्चे दरबार में शरण लेता है, तब उसे संसार की सारी मिथ्या छाया से मुक्ति मिलती है। वह सारी दुनिया घूम आया, पर उसे कोई सच्चा साथी न मिला, सिवाय खाटूवाले श्याम के, जो उसका सच्चा संरक्षक और सहारा है। यह संसार एक झूठा सपना है, पर श्याम का दरबार सत्य और प्रेम का वह आलम है, जहाँ भक्त अपने सारे दुख और संकट भूल जाता है। वह श्याम को अपना माता-पिता, अपना सब कुछ मानता है और उनके चरणों में ही रहने की कामना करता है। भक्त की पुकार है कि बाबा उसका ध्यान रखें, क्योंकि वह उनके बिना कहीं नहीं जा सकता। श्याम का दरबार ही उसका अंतिम ठिकाना है, जहाँ वह पूर्ण समर्पण के साथ अपनी अर्जी रखता है।
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