भक्तो ने पुकारा हैं मेरे द्वार चली आओ भजन
भक्तो ने पुकारा हैं मेरे द्वार चली आओ भजन
भक्तों ने पुकारा है,
एक बार चली आओ।
मेरे द्वार चली आओ,
जगदम्बे चली आओ।
माँ अम्बे चली आओ,
निर्धन के घर भी माँ,
एक बार चली आओ।।
(अंतरा 1)
ममता की छांव तले,
कब मुझको शरण दोगी?
रो-रो के मनाऊंगी,
कब तक यूँ रूठोगी?
अपने बच्चों को माँ,
इतना भी ना तरसाओ,
माँ अम्बे चली आओ,
जगदम्बे चली आओ।।
(अंतरा 2)
हर ईंट मेरे घर की,
माँ तुझको पुकारेगी।
देहलीज़ तेरे चरणों की,
राह निहारेगी।
मेरे घर का भी माँ,
आ भाग जगा जाओ,
एक बार चली आओ,
जगदम्बे चली आओ।।
(अंतरा 3)
मैंने ये सुना है माँ,
ममता की तू मूरत है।
आज तेरी ममता की,
माँ मुझको ज़रूरत है।
मैं तड़प रही पल-पल,
इतना भी ना तड़पाओ,
एक बार चली आओ,
जगदम्बे चली आओ।।
(अंतरा 4)
तेरे ही सहारे हूँ,
मैं और कहाँ जाऊँ?
दर्शन के प्यासे दिल को,
कैसे मैं समझाऊँ?
मुझपे मेहरावाली,
माँ मेहर तो बरसाओ।
एक बार चली आओ,
जगदम्बे चली आओ।।
(समापन)
निर्धन के घर भी माँ,
एक बार चली आओ।
मेरे द्वार चली आओ,
माँ अम्बे चली आओ।
मेरे द्वार चली आओ,
जगदम्बे चली आओ।।
भक्तों ने पुकारा है…
एक बार चली आओ।।
Bhakto Ne Pukara Hai | Maa Ambe Chali Aao | Jagdambe Chali Aao | Mata Rani Song
इस भजन में माँ अम्बे के लिए भक्त की वह व्याकुल पुकार है, जो हृदय को पिघला देती है। यह एक बच्चे की माँ के लिए तड़प है, जो निर्धन के झोपड़े से लेकर हर घर की दहलीज तक गूँजती है। माँ की ममता की छाँव तले शरण पाने की चाह, जैसे कोई पथिक तपती धूप में ठंडी छाया खोजे। भक्त का मन रो-रोकर माँ को मनाता है, उनकी कृपा की प्रतीक्षा में पल-पल तड़पता है।
हर ईंट, हर कोना माँ के आगमन की राह देखता है, जैसे कोई दीया हवा में भी जलने को बेकरार हो। माँ की ममता वह सागर है, जो सबको समेट लेता है, और भक्त उसी सागर में डुबकी लगाने को आतुर है। सत्य का मार्ग यही है कि माँ की शरण में ही सच्ची शांति और मुक्ति है।
चिंतन का भाव है कि माँ का दर्शन वह अमृत है, जो प्यासे मन को तृप्त करता है। जैसे कोई बच्चा माँ की गोद में सारी पीड़ा भूल जाता है, वैसे ही माँ अम्बे की मेहर भक्त के दुखों को हर लेती है। यह समर्पण ही है, जो निर्धन के द्वार पर भी माँ को बुला लाता है।