विरात्रा री पहाड़ियों में धाम थारो

विरात्रा री पहाड़ियों में धाम थारो वाकल माँ भजन

(मुखड़ा)

विरात्रा री पहाड़ियों में,
धाम थारो म्हाने लागे न्यारो,
म्हाने प्यारो-प्यारो लागे,
वाकल नाम थारो।।
(अंतरा 1)

शक्ति रूप में हिंगलाज माँ,
हिरण भखार में आईं,
श्रद्धा-भाव से राजा विक्रम ने,
प्रतिष्ठा माँ की कराई।

ऊँचे पर्वत पे, बाणियो है,
थारो मंदिर न्यारो,
म्हाने लागे प्यारो,
सबसूँ प्यारो, सबसूँ न्यारो,
धाम थारो,
विरात्रा री पहाड़ियों में।।
(अंतरा 2)

लाल चुनरियाँ, लाल है चूड़ो,
सज सोलह सिंगार,
रूप अनूप है, माँ वाकल रो,
बैठ्या सिंह सवार।

लागे स्वर्गा सूँ सुंदर,
मैया, धाम थारो,
म्हाने लागे प्यारो,
म्हारा हिवड़ा में बसियो,
वाकल नाम थारो,
विरात्रा री पहाड़ियों में।।
(अंतरा 3)

सांचो है दरबार वाकल रो,
बिन माँग्या मिल जावे,
अन्न-धन रो भंडार भरे,
बांझिया री गोद भरावे।

म्हाने आसरो है, मैय्या जी,
बस एक थारो, बस एक थारो,
कृपा री नजरिया, वाकल,
म्हापे डारो,
विरात्रा री पहाड़ियों में।।
(अंतिम पुनरावृत्ति)

विरात्रा री पहाड़ियों में,
धाम थारो म्हाने लागे न्यारो,
म्हाने प्यारो-प्यारो लागे,
वाकल नाम थारो।।
 


वांकल माँ का प्यारा सा भजन I प्यारो-प्यारो लागे वांकल नाम थारो I नवरात्री भजन 2020 I डॉ. सीमा दफ्तरी विरात्रा की पहाड़ियों में माँ वाकल का धाम अनूठा और प्रिय है, जहाँ उनका नाम हर दिल को भाता है। हिंगलाज माँ के शक्ति रूप में अवतरित होकर राजा विक्रम ने ऊँचे पर्वत पर उनकी प्रतिष्ठा की, जहाँ उनका मंदिर स्वर्ग से भी सुंदर लगता है। लाल चुनरी और सोलह श्रृंगार में सजी माँ सिंह पर सवार हैं, जिनका रूप अनुपम है और भक्तों के हृदय में बस्ता है।
Next Post Previous Post