सांचो है दरबार वाकल रो, बिन माँग्या मिल जावे, अन्न-धन रो भंडार भरे, बांझिया री गोद भरावे।
म्हाने आसरो है, मैय्या जी, बस एक थारो, बस एक थारो, कृपा री नजरिया, वाकल, म्हापे डारो, विरात्रा री पहाड़ियों में।। (अंतिम पुनरावृत्ति)
विरात्रा री पहाड़ियों में, धाम थारो म्हाने लागे न्यारो, म्हाने प्यारो-प्यारो लागे, वाकल नाम थारो।।
वांकल माँ का प्यारा सा भजन I प्यारो-प्यारो लागे वांकल नाम थारो I नवरात्री भजन 2020 I डॉ. सीमा दफ्तरी विरात्रा की पहाड़ियों में माँ वाकल का धाम अनूठा और प्रिय है, जहाँ उनका नाम हर दिल को भाता है। हिंगलाज माँ के शक्ति रूप में अवतरित होकर राजा विक्रम ने ऊँचे पर्वत पर उनकी प्रतिष्ठा की, जहाँ उनका मंदिर स्वर्ग से भी सुंदर लगता है। लाल चुनरी और सोलह श्रृंगार में सजी माँ सिंह पर सवार हैं, जिनका रूप अनुपम है और भक्तों के हृदय में बस्ता है।