श्याम बाबा को श्रृंगार मन भावे भजन
श्याम बाबा को श्रृंगार मन भावे भजन
श्याम बाबा को श्रृंगार मन भावे,
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खाटू वाळे को दरबार मन भावै,
दुनियाँ का नज़ारा के देखा, के देखा,
श्याम बाबा को श्रृंगार मन भावै।
ऐ को मुखड़ों प्यारो प्यारों,
ईकी आँख्या जो अमृत की प्याली,
ऐ की माथे मुकुट है छापर,
मोर पंखियाँ गज़ब की निराली,
ऐ का घूंघर वाला बाल,
ऐ के हीरो चमके भाल,
में चाँद सितारा के देखा के देखा,
श्याम बाबा को श्रृंगार मन भावै।
ये तो बदल बदल करे पहरे,
नित बाग़ां रंग बिरंगा,
कद केसर लाल गुलाबी,
कदे धौळा कदे पचरंगा,
बागो पेहरे घेर गुमेर,
पहरे थोड़ी थोड़ी देर,
एक बागो दोबारा ना देखा ना देखा,
श्याम बाबा को श्रृंगार मन भावै।
ऐ के मोटा मोटा गजरा,
फूल कई भांत का पिरोया,
ऊपर से इतर छिड़के,
चारो कानी से सेवक है आया,
म्हारों बाबो है शौकीन,
देख्या तबियत हो रंगीन,
गुलशन की बहारा के देखा के देखा,
श्याम बाबा को श्रृंगार मन भावै।
बेठ्यो दरबार लगाकर,
यो तो मन्द मन्द मुस्कावे,
मांगणिया ने यो बांटे,
यो प्रेमी से प्रेम बढ़ावे,
सारो बाबा को परिवार,
बिन्नू श्याम लुटावे प्यार,
अठे थारा और म्हारा के देखा के देखा,
श्याम बाबा को श्रृंगार मन भावै।
श्याम बाबा को श्रृंगार मन भावे,
खाटू वाळे को दरबार मन भावै,
दुनियाँ का नज़ारा के देखा, के देखा,
श्याम बाबा को श्रृंगार मन भावै।
दुनियाँ का नज़ारा के देखा, के देखा,
श्याम बाबा को श्रृंगार मन भावै।
ऐ को मुखड़ों प्यारो प्यारों,
ईकी आँख्या जो अमृत की प्याली,
ऐ की माथे मुकुट है छापर,
मोर पंखियाँ गज़ब की निराली,
ऐ का घूंघर वाला बाल,
ऐ के हीरो चमके भाल,
में चाँद सितारा के देखा के देखा,
श्याम बाबा को श्रृंगार मन भावै।
ये तो बदल बदल करे पहरे,
नित बाग़ां रंग बिरंगा,
कद केसर लाल गुलाबी,
कदे धौळा कदे पचरंगा,
बागो पेहरे घेर गुमेर,
पहरे थोड़ी थोड़ी देर,
एक बागो दोबारा ना देखा ना देखा,
श्याम बाबा को श्रृंगार मन भावै।
ऐ के मोटा मोटा गजरा,
फूल कई भांत का पिरोया,
ऊपर से इतर छिड़के,
चारो कानी से सेवक है आया,
म्हारों बाबो है शौकीन,
देख्या तबियत हो रंगीन,
गुलशन की बहारा के देखा के देखा,
श्याम बाबा को श्रृंगार मन भावै।
बेठ्यो दरबार लगाकर,
यो तो मन्द मन्द मुस्कावे,
मांगणिया ने यो बांटे,
यो प्रेमी से प्रेम बढ़ावे,
सारो बाबा को परिवार,
बिन्नू श्याम लुटावे प्यार,
अठे थारा और म्हारा के देखा के देखा,
श्याम बाबा को श्रृंगार मन भावै।
श्याम बाबा को श्रृंगार मन भावे,
खाटू वाळे को दरबार मन भावै,
दुनियाँ का नज़ारा के देखा, के देखा,
श्याम बाबा को श्रृंगार मन भावै।
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श्याम बाबा के प्रति भक्ति का भाव मन को एक ऐसी शांति और आनंद से भर देता है, जो सांसारिक सुखों से कहीं अधिक गहरा और स्थायी है। उनके श्रृंगार में सजा हुआ रूप, जिसमें मोरपंख का मुकुट, घुंघराले बालों की लटें, और माथे पर चमकता तिलक, भक्त के मन को एक अलौकिक सौंदर्य की ओर खींचता है। उनकी आँखों में झलकता प्रेम और करुणा का अमृत हर दुख को हर लेता है, मानो वह भक्त के हृदय में एक नई ऊर्जा और विश्वास का संचार करता हो। रंग-बिरंगे वस्त्र और फूलों के गजरे, जिनमें हर बार नई सुगंध और सजावट होती है, यह दर्शाते हैं कि श्याम की भक्ति में हर पल एक नया रंग और उत्साह है। यह श्रृंगार केवल बाहरी नहीं, बल्कि उस अनंत प्रेम का प्रतीक है, जो भक्त को सांसारिक माया से मुक्त कर उनके चरणों में लीन कर देता है।
Shyam Baba Ko Shringar Man Bhave || Khatu Shyam Bhajan || Jaya Kisori Ji Album - Shyam Baba Ko Shringar Man Bhave
Song - Shyam Baba Ko Shringar Man Bhave
Singer Name: Pujya Jaya Kishori Sharma,Chetna Sharma
Music - PREM PRAKASH DUBEY
Lyrics - Traditional
Song - Shyam Baba Ko Shringar Man Bhave
Singer Name: Pujya Jaya Kishori Sharma,Chetna Sharma
Music - PREM PRAKASH DUBEY
Lyrics - Traditional
