ऊरी कुरु मामज्ञमनाथं दूरी कुरु मे दुरितं भो Uri Kuru Mamagyamanatham Duri Kuru Me Duritam Bho साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम् Samba Sadashiva Shambho Shankara Sharanam Me Tava Charanayugam ॐ नमः शिवाय Om Namah Shivaya ॐ नमः शिवाय
ॠषिवर मानस हंस चराचर जनन स्थिति लय कारण भो Rshivara Manasa Hamsa Charachara Janana Sthiti Laya Karana Bho साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम् Samba Sadashiva Shambho Shankara Sharanam Me Tava Charanayugam
अन्तः करण विशुद्धिं भक्तिं च त्वयि सतीं प्रदेहि विभो Antah Karana Vishuddhim Bhaktim Cha Tvayi Satim Pradehi Vibho साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम् Samba Sadashiva Shambho Shankara Sharanam Me Tava Charanayugam
करुणा वरुणा लय मयिदास उदासस्तवोचितो न हि भो Karuna Varuna Laya Mayidasa Udasastavochito Na Hi Bho साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम् Samba Sadashiva Shambho Shankara Sharanam Me Tava Charanayugam ॐ नमः शिवाय Om Namah Shivaya ॐ नमः शिवाय Om Namah Shivaya
हाऽहाऽहूऽहू मुख सुरगायक गीता पदान पद्य विभो Ha Ha Hu Hu Mukha Suragayaka Gita Padana Padya Vibho साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम् Samba Sadashiva Shambho Shankara Sharanam Me Tava Charanayugam ॐ नमः शिवाय Om Namah Shivaya ॐ नमः शिवाय Om Namah Shivaya
MOST POPULAR SONG OF LORD SHIVA EVER | Shiva Songs | Isha Girisha Naresha Paresha | Shiv Stuti Singer: Rajalakshmee Sanjay
Music Director: J Subhash, संगीत निर्देशन जे. शुभाष। Lyrics: Traditional, रचना लेखन : पारम्परिक। Language: Sanskrit, भाषा : हिंदी संस्कृत। Edit & Gfx : Prem Graphics PG Music Label: Music Nova : नोवा म्यूजिक। साम्ब सदाशिव साम्ब सदाशिव हिंदी मीनिंग Meaning of 'Samb'
स + अम्बा = साम्ब (यानी अम्बा के साथ) स + उमा = सोम (यानी उमा के साथ) स + उमा + स्कन्ध = सोमस्कन्ध (अर्थात उमा और स्कन्ध के साथ) उपरोक्त सभी भगवान शिव के नाम हैं। सांब को अक्सर शिव और शक्ति (माता दुर्गा/शक्ति) पहलू को एक साथ दर्शाने के लिए शास्त्रों में उपयोग किया जाता है। साम्ब शब्द का उपयोग लिंग पुराण और शिव पुराण में प्राय किया गया है। सदाशिव से आशय पूर्ण रूप से शुद्ध होता है। एवमुक्त्वा महादेवः साम्बः संसारमोचक । सत्य ज्ञान परानन्दस्तत्रैवान्तरधीयत ।। सर्वैश्वर्यैण संपन्न: सर्वेश सर्व कारणम् । शंभुरेव सदा साम्बो न विष्णुर्न प्रजापति ।। शिवंकरत्वं संपूर्णं शिवस्यैव परात्मन: । साम्बमूर्तिधरस्यास्य जगतः कारणस्य हि ।।