Janam Janam Ka Tumase Naata, Tum Hi Jag Ke Bhaagy Vidhaata, Tum Sang Prit Hamaari, Dinadayaal Dayaal Giradhaari,
Tum Daata Ham Daasa Svaami, Tum Sab Jaano Antaryaami, Tum Jag Ke Hitakaari, Dinadayaal Giradhaari,
Maur Mukut Pitaambaradhaari, He Manamohan Giravar Dhaari, Ham Hain Sharan Tihaari, Dinadayaal Giradhaari,
विनती सुनो बनवारी दीनदयाल गिरधारी भजन
विनती सुनो बनवारी :
हे श्री कृष्ण आप हमारी विनती को सुनिए। श्री कृष्ण को गायों के चराने
जंगल में विचरण करना पड़ता था इसलिए कृष्ण जी को बनवारी कहा जाता है।
दीनदयाल गिरधारी : श्री कृष्ण को दीनों का रक्षक/दयाल कहा जाता है और गोवर्धन पर्वत अंगुली पर उठाने के कारण गिरधारी के नाम से पुकारा जाता है। जनम जनम का तुमसे नाता : हे श्री कृष्ण आपसे हमारा जन्मों का नाता है। तुम ही जग के भाग्य विधाता : हे नाथ आप ही इस समस्त श्रष्टि के भाग्य विधाता हैं। तुम संग प्रीत हमारी : हे कृष्ण जी आपके साथ ही हमारी प्रीत है। तुम दाता हम दासा स्वामी : आप इस जगत के दाता हैं और हम आपके दास हैं। तुम सब जानो अन्तर्यामी : आप अन्तर्यामी हैं, सब कुछ जानते हैं। तुम जग के हितकारी, : आप जग के हितकारी हैं। मौर मुकुट पीताम्बरधारी : मोर के पंखों से बना मुकुट धारण करने वाले और पीले वस्त्रों को पहनने वाले आप पीताबंर धारी हैं। हे मनमोहन गिरवर धारी : हे मन को मोह लेने वाले पर्वत को धारण करने वाले हम हैं शरण तिहारी, दीनदयाल गिरधारी ; हम सभी आपकी शरण में हैं।