आवो नी पधारो म्हारे आंगणिये खेतेश्वर भजन
आवो नी पधारो म्हारे आंगणिये खेतेश्वर भजन
आवो नी पधारो म्हारे,आंगणिये खेतेश्वर,
मात पिता हो दाता थे ही गुरुवर,
म्हारा प्यारा ओ परमेश्वर।
आवो नी पधारो म्हारे,
आंगणिये खेतेश्वर।
उग्या सूं आथवता दाता,
खेतेश्वर ने टेरता,
सुतोड़ा सपना में बाबा,
खेतेश्वर ने देखता,
प्रेम रा प्याला पाया भरभर कर,
ओ म्हारा प्यारा रे खेतेश्वर,
आवो नी पधारो म्हारें,
आंगणिये खेतेश्वर,
मात पिता हो दाता, थे ही गुरुवर,
ओ दाता थे ही गुरुवर,
ओ म्हारा प्यारा ओ परमेश्वर।
जठे देखूँ उठे नज़र,
खेतेश्वर ही आवता,
घर घर में और गली गली में,
भजना में वे गावता,
पार लगावो म्हानें भवसागर,
ओ दाता, पार लगावो म्हानें भवसागर,
ओ म्हारा प्यारा रे खेतेश्वर,
आवो नी पधारो म्हारें,
आंगणिये खेतेश्वर,
मात पिता हो दाता, थे ही गुरुवर,
ओ दाता थे ही गुरुवर,
ओ म्हारा प्यारा ओ परमेश्वर।
प्रेम सूं परोसूं थाने,
भाव रा भोजनिया,
खेतेश्वर दाता आया,
भगता रे आंगणियां,
फूलड़ा बिछावा म्हे तो डगर डगर,
ओ दाता, फूलड़ा बिछावा म्हे तो डगर डगर,
ओ म्हारा प्यारा रे खेतेश्वर,
आवो नी पधारो म्हारें,
आंगणिये खेतेश्वर,
मात पिता हो दाता, थे ही गुरुवर,
ओ दाता थे ही गुरुवर,
ओ म्हारा प्यारा ओ परमेश्वर।
मन में बसिया ओ म्हारा,
जोगी अलबेला,
खेतेश्वर गुरु म्हे तो,
बणिया थारा चेला,
दास गोपाल कहे बाबा ने सुमिर,
ओ म्हारा प्यारा रे खेतेश्वर,
आवो नी पधारो म्हारें,
आंगणिये खेतेश्वर,
मात पिता हो दाता, थे ही गुरुवर,
ओ दाता थे ही गुरुवर,
ओ म्हारा प्यारा ओ परमेश्वर।
भजन श्रेणी : राजस्थानी भजन (Read More : Rajasthani Bhajan)
आवो नी पधारो म्हारे आंगणे खेतेश्वर दाता 2018
Aavo Ni Padhaaro Mhaare,
Aanganiye Kheteshvar,
Maat Pita Ho Daata The Hi Guruvar,
Mhaara Pyaara O Parameshvar.
Aavo Ni Padhaaro Mhaare,
Aanganiye Kheteshvar.
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आवो नी पधारो म्हारे आंगणे खेतेश्वर दाता 2018
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Aao Ni Padharo Mhari Aanganiye Kheteshwar · Kushal Barath, Moinuddhin Manchala, Mahendra Panwar, Heeralal
Kheteshwar Khede Janamiya
℗ Shree Krishna Cassettes
Released on: 2022-04-23
Kheteshwar Khede Janamiya
℗ Shree Krishna Cassettes
Released on: 2022-04-23
खेतेश्वर दाता आंगन में पधारें, तो घर रोशन हो उठता। मां-बाप जैसे प्यार, दाता गुरु वर बने रहते, हर सांस में बुलाते। उगते सूरज से शाम तक टेरते, सपनों में बाबा दिखते, प्रेम का प्याला भर-भरकर पिलाते। जिधर नजर जाए, वही आते, घर-घर गली-गली भजनों में गाते। भवसागर पार लगाते, फूल बिछाकर डगर सजाते। ये प्यार इतना गहरा कि मन डूब जाए। इश्वर का आशीर्वाद है, जो हर कदम सहारा देता।
भाव से भोजन परोसें, भगतों के आंगन सजें, जोगी अलबेला मन में बस जाएं। गुरु बन चेला हो जाएं, दास गोपाल सुमिरन करें। जीवन की राह आसान लगे, हर दुख दूर हो। हमें दिखाते हैं कि सच्चा बंधन प्रेम का होता है, हर पल नई आनंद बरसे। ऐसे दिव्य साथ से जीवन जीयो। आप सब पर इश्वर की कृपा बनी रहे, दिल को छू ले ऐसी शांति मिले। जय खेतेश्वर जी की!
भाव से भोजन परोसें, भगतों के आंगन सजें, जोगी अलबेला मन में बस जाएं। गुरु बन चेला हो जाएं, दास गोपाल सुमिरन करें। जीवन की राह आसान लगे, हर दुख दूर हो। हमें दिखाते हैं कि सच्चा बंधन प्रेम का होता है, हर पल नई आनंद बरसे। ऐसे दिव्य साथ से जीवन जीयो। आप सब पर इश्वर की कृपा बनी रहे, दिल को छू ले ऐसी शांति मिले। जय खेतेश्वर जी की!
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