जहाँ कबीर साहेब सदैव ही जग कल्याण के लिए प्रेरित हैं, वहीँ पर कुछ स्थानों पर उन्होंने जगत को छोड़ कर आत्म कल्याण को महत्त्व दिया है। उन्होंने पाया की कुछ लोग समझाने पर नहीं समझते हैं, या फिर समझना ही नहीं चाहते हैं की उनके जीवन का उद्देश्य क्या है, वे कहाँ से आये हैं और कहाँ को जाने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे लोगों के लिए साहेब साधक को ज्ञान देते हैं की तुम उनको उनके हाल पर छोड़ दो, यदि वे इस भव सागर में बह रहे हैं, नहीं समझ पा रहे हैं की वे पतन की ओर अग्रसर हैं तो तुम स्वंय पर ध्यान दो और मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करो। इस भजन का हिंदी अर्थ /मीनिंग निचे दिया गया है, अवश्य ही आपको पसंद आएगा।
भजन के बोल/लिरिक्स बहि जाने दे, बहि जाने दे, बहि जाने दे अस लोगन को बहि जाने दे, अस लोगन को बहि जाने दे।