आना भी अकेला है जाना भी अकेला है भजन
आना भी अकेला है जाना भी अकेला है भजन
मोह में फंसा है प्राणी,
चार दिन का मेला है,
आना भी अकेला है,
जाना भी अकेला है।
कोड़ी कोड़ी माया जोड़ी,
इसका क्या ठिकाना है,
माटी का शरीर तेरा,
माटी हो जाना है,
मोह में फंसा है प्राणी,
चार दिन का मेला है,
आना भी अकेला है,
जाना भी अकेला है।
जितना भी कमाया तूने,
यही रह जाएगा,
गाड़ी धन दौलत तेरे,
साथ नहीं जाएगा,
मोह में फंसा है प्राणी,
चार दिन का मेला है,
आना भी अकेला है,
जाना भी अकेला है।
मोह में फंसा है प्राणी,
चार दिन का मेला है,
आना भी अकेला है,
जाना भी अकेला है।
चार दिन का मेला है,
आना भी अकेला है,
जाना भी अकेला है।
कोड़ी कोड़ी माया जोड़ी,
इसका क्या ठिकाना है,
माटी का शरीर तेरा,
माटी हो जाना है,
मोह में फंसा है प्राणी,
चार दिन का मेला है,
आना भी अकेला है,
जाना भी अकेला है।
जितना भी कमाया तूने,
यही रह जाएगा,
गाड़ी धन दौलत तेरे,
साथ नहीं जाएगा,
मोह में फंसा है प्राणी,
चार दिन का मेला है,
आना भी अकेला है,
जाना भी अकेला है।
मोह में फंसा है प्राणी,
चार दिन का मेला है,
आना भी अकेला है,
जाना भी अकेला है।
आना भी अकेला हैं जाना भी अकेला है || Shri Ankush Ji Maharaj|| Aana Bhi Akela h Jana Bhi Akela h||
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आना भी अकेला हैं जाना भी अकेला है ||
Shri Ankush Ji Maharaj||
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Author - Saroj Jangir
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