माता मेरी लाज रख ले तेरे चरणों में शीश भजन
माता मेरी लाज रख ले तेरे चरणों में शीश में झुकाऊँ भजन
तेरे चरणों में शीश में झुकाऊँ,तेरे ही गुण गाऊं,
ओ माता मेरी लाज रख ले,
लाज रख ले,
और किसके द्वारे पर मैं जाऊँ,
मैया जी मेरी लाज रख ले, माँ,
तेरे चरणों में शीश में झुकाऊं,
तेरे ही गुण गाऊं,
ओ माता मेरी लाज रख ले।
मिलता नहीं जो कहीं सारे संसार में,
मिलता है वह तेरे सच्चे दरबार में,
तेरे भरे हैं भंडारे शेरोवाली,
तू जग से निराली,
है पूजे संसार तुझको,
संसार तुझको ओ मैया,
ऊंचे पहाड़ों वाली,
है पूजे संसार तुझको, मेरी मां।
तेरी ज्योत का है,
उजियारा कण कण में
तू ही करें दूर,
अंधियारा एक क्षण में,
बुझे दिलों को तू रोशन करें है
जो दुखों से भरे हैं, मा उन को तू,
देती है खुशी
देती है खुशी जोता वालिए,
तू झोलियां भरे हैं,
मां भक्तों को देती तू खुशी, मेरी मां।
आया लेकर आस मैया मैं भी,
तेरे द्वार पर,
बालक नादान पर तू,
कर उपकार दे,
मुख बालकों से कभी ना मोड़े,
मां करती है प्यार सबको,
कभी बीच मझधार में ना छोड़े,
मां करती है प्यार सबको, मेरी मां।
करूँ मैं अराधना सवेरे श्याम तेरी माँ,
होकर तू दयाल बेड़ी पार कर मेरी माँ,
तेरे द्वार से ना जाऊंगा मैं खाली,
ओ मेहरो वाली मां सुन ले तू मेरी विनती,
खड़ा दर पर यह लक्खा है सवाली,
मां सुन ले तू मेरी विनती, मेरी मां।
माता मेरी लाज रख ले | Mata Sherowali Most Popular Bhajan by Lakhbir Singh Lakkha | Full HD Song
तेरे चरणों में शीश मैं झुकाऊं तेरे ही गुण गाऊं भजन
(मुखड़ा)
तेरे चरणों में शीश मैं झुकाऊं,
तेरे ही गुण गाऊं,
ओ माता मेरी लाज रख ले,
लाज रख ले,
और किसके द्वारे पे मैं जाऊं,
मैया जी मेरी लाज रख ले ओ माँ।।
(अंतरा)
मिलता नहीं जो कहीं,
सारे संसार में,
मिलता है वो तेरे,
सच्चे दरबार में,
तेरे भरे हैं भंडारे शेरोवाली,
तू जग से निराली,
है पूजे संसार तुझको,
संसार तुझको मैया,
ऊँचे ओ पहाड़ों वाली,
है पूजे संसार तुझको मेरी माँ।।
तेरी ज्योत का है,
उजियारा कण-कण में,
तू ही करे दूर अंधियारा,
एक क्षण में,
बुझे दिलों को तू,
रोशन करे है,
जो दुखों से भरे हैं,
माँ उनको तू देती है खुशी,
देती है खुशी जोतवालिए,
तू झोलियां भरे है मेरी माँ।।
आया लेके आस मैया,
मैं भी तेरे द्वार पे,
बालक नादान पे तू,
कर उपकार दे,
मुख बालकों से,
कभी ना माँ मोड़े,
ना वादा कभी तोड़े,
माँ करती है प्यार सबको,
प्यार सबको कभी बीच,
मझधार में ना छोड़े,
माँ करती है प्यार सबको मेरी माँ।।
करूँ मैं आराधना,
सवेरे-शाम तेरी माँ,
हो के तू दयाल,
बेड़ी पार कर मेरी माँ,
तेरे द्वार से,
जाऊंगा ना मैं खाली,
ओ मेहरोवाली,
माँ सुन ले तू मेरी विनती,
मेरी विनती, खड़ा दर पर,
है लख्खा ये सवाली,
माँ सुन ले तू मेरी विनती ओ माँ।।
(अंतिम पुनरावृत्ति)
तेरे चरणों में शीश मैं झुकाऊं,
तेरे ही गुण गाऊं,
ओ माता मेरी लाज रख ले,
लाज रख ले,
और किसके द्वारे पे मैं जाऊं,
मैया जी मेरी लाज रख ले ओ माँ।।
(मुखड़ा)
तेरे चरणों में शीश मैं झुकाऊं,
तेरे ही गुण गाऊं,
ओ माता मेरी लाज रख ले,
लाज रख ले,
और किसके द्वारे पे मैं जाऊं,
मैया जी मेरी लाज रख ले ओ माँ।।
(अंतरा)
मिलता नहीं जो कहीं,
सारे संसार में,
मिलता है वो तेरे,
सच्चे दरबार में,
तेरे भरे हैं भंडारे शेरोवाली,
तू जग से निराली,
है पूजे संसार तुझको,
संसार तुझको मैया,
ऊँचे ओ पहाड़ों वाली,
है पूजे संसार तुझको मेरी माँ।।
तेरी ज्योत का है,
उजियारा कण-कण में,
तू ही करे दूर अंधियारा,
एक क्षण में,
बुझे दिलों को तू,
रोशन करे है,
जो दुखों से भरे हैं,
माँ उनको तू देती है खुशी,
देती है खुशी जोतवालिए,
तू झोलियां भरे है मेरी माँ।।
आया लेके आस मैया,
मैं भी तेरे द्वार पे,
बालक नादान पे तू,
कर उपकार दे,
मुख बालकों से,
कभी ना माँ मोड़े,
ना वादा कभी तोड़े,
माँ करती है प्यार सबको,
प्यार सबको कभी बीच,
मझधार में ना छोड़े,
माँ करती है प्यार सबको मेरी माँ।।
करूँ मैं आराधना,
सवेरे-शाम तेरी माँ,
हो के तू दयाल,
बेड़ी पार कर मेरी माँ,
तेरे द्वार से,
जाऊंगा ना मैं खाली,
ओ मेहरोवाली,
माँ सुन ले तू मेरी विनती,
मेरी विनती, खड़ा दर पर,
है लख्खा ये सवाली,
माँ सुन ले तू मेरी विनती ओ माँ।।
(अंतिम पुनरावृत्ति)
तेरे चरणों में शीश मैं झुकाऊं,
तेरे ही गुण गाऊं,
ओ माता मेरी लाज रख ले,
लाज रख ले,
और किसके द्वारे पे मैं जाऊं,
मैया जी मेरी लाज रख ले ओ माँ।।
Song: Tere Charno Mein Sheesh Main Jhukaun
Singer: Lakhbir Singh Lakkha
Music: Sohan Lal
Lyrics: Ram Lal Sharma
Category: HIndi Devotional
माँ के चरणों में सिर झुकाने से मन को शांति मिलती है। जैसे कोई थका हुआ बच्चा माँ की गोद में आकर सब भूल जाता है, वैसे ही सारे जगत के द्वार बंद होने पर भी माँ का दरबार हमेशा खुला रहता है। वहाँ जाकर जो भी माँगो, वह पूरी होती है क्योंकि माँ की भंडार में कभी कमी नहीं होती। ऊँचे पहाड़ों पर विराजमान शेरों वाली माँ जगत की हर एक पर नजर रखती हैं, और जो भी उनके पास आता है, उसे कभी निराश नहीं करतीं। उनका उजाला हर कण में फैला हुआ है, अंधेरा दूर कर देती हैं एक पल में। दुख से भरे दिलों को रोशन कर खुशियाँ बाँटती हैं, झोली भर देती हैं अपनी कृपा से।
जब हम माँ के द्वार पर खड़े होकर आस लेकर आते हैं, तो वह नादान बच्चों की तरह हमारी हर गलती माफ कर देती हैं। कभी मुँह नहीं मोड़तीं, बीच मझधार में नहीं छोड़तीं। सवेरे-शाम उनकी आराधना करने से जीवन की हर बेड़ी पार हो जाती है। माँ दयालु हैं, मेहरबान हैं, सुनती हैं हर विनती को। जो भी उनके दर पर खड़ा होता है, खाली हाथ नहीं लौटता। इसीलिए हर साधक का मन यही कहता है कि माँ के अलावा और किसके पास जाएँ। आप सभी पर माँ की कृपा बनी रहे। जय श्री माता वैष्णो देवी जी की।