म्हारी हुंडी स्वीकारों महाराज Mhari Hundi Swikaro Maharaj
म्हारी हुंडी स्वीकारों महाराज, साँवरा गिरधारी, गिरधारी रे म्हारा गिरधारी, गिरधारी रे म्हारा बनवारी, म्हारी हुण्डी स्वीकारों महाराज, साँवरा गिरधारी।
राखी पत प्रहलाद की, राखी पत प्रहलाद की, तूने हर लीनो भूमि को भार, साँवरा गिरधारी, गिरधारी रे म्हारा गिरधारी, गिरधारी रे म्हारा गिरधारी, म्हारी हुण्डी स्वीकारों महाराज, साँवरा गिरधारी।
खम्ब फाड़ प्रकट भए तुम,
खम्ब फाड़ प्रकट भए तुम, तूने नरसिंह लीन्यो अवतार, साँवरा गिरधारी, गिरधारी रे म्हारा गिरधारी, गिरधारी रे म्हारा गिरधारी, म्हारी हुण्डी स्वीकारों महाराज, साँवरा गिरधारी।
जाकों नहीं आसरो कोई, जाकों नहीं आसरो कोई, आसरो कोई, आसरो कोई, वाको तूही है आधार, साँवरा गिरधारी, गिरधारी रे म्हारा गिरधारी, गिरधारी रे म्हारा गिरधारी, म्हारी हुण्डी स्वीकारों महाराज, साँवरा गिरधारी।
गिरधारी............. म्हारा गिरधारी.... तूने गिरवर उठायो तो, गिरधर तोहे, पार ब्रह्म ने ना पायो तो, ब्रह्मा कहलायो है,
लाज द्रौपदी की राखन को, चीर बढायो तूने, सब तकत रहे देख, पार काहूँ ने ना पायो है, रथ अर्जुन को हांक, रथवान कहाए तुम, करी गज ने पुकार, श्याम नंगे पाँव ध्यायो है, भक्त नरसी की हुंडी तरी, श्यामल शाह बन गए हरी, देख भक्तन को को प्रेम, भात तूने भरायो है, पर मेरी बेर ऐसी देर, काहे दीनानाथ किन्ही, बांवरी के अवगुण से, श्याम घबरायो है, म्हारी हुण्डी स्वीकारों महाराज, साँवरा गिरधारी।