जोगी पुछदा फिरदा घर माता रत्नों लुहारी दा भजन

जोगी पुछदा फिरदा घर माता रत्नों लुहारी दा भजन

निक्का जेहा जोगी पिंड पहली वार वेखया,
चरणा च सीस रख, कईया मथा टेकया,
हो लोकी गुण गाउँदे, सूरत प्यारी दा,
जोगी पुछदा फिरदा, घर माता रत्नों लुहारी दा,
जोगी पुछदा फिरदा.....

घर घर फिरदा ए अलख जगाउँदा,
सोहना मुख सारेया दे मन नू है भाउंदा,
हो मिल मोड़ना ए, पर-उपकारी दा,
जोगी पुछदा फिरदा, घर माता रत्नों लुहारी दा,
जोगी पुछदा फिरदा.....

इक माता केहन्दी घर भूल के आ गया,
इक माता केहन्दी मेरे मन नू भा गया,
हो रब रूप धार, आया ए भिखारी दा,
जोगी पुछदा फिरदा, घर माता रत्नों लुहारी दा,
जोगी पुछदा फिरदा.....

सिर ते जटावा, सिंघी सजदी बड़ी ए,
देख भोला मुख, रूह रजदी बड़ी ए,
हो ध्यान खिचदा ए, खलकत सारी दा,
जोगी पुछदा फिरदा, घर माता रत्नों लुहारी दा,
जोगी पुछदा फिरदा.....

जानी जान सारेया दे दिला दिया जाने,
नूर सदा मनदा, जोगी दे मीठे भाने,
हो राह लंग आया, जंगली पहाड़ी दा,
जोगी पुछदा फिरदा, घर माता रत्नों लुहारी दा,
जोगी पुछदा फिरदा.....



JOGI PUSHDA FIRDA

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Saroj Jangir Author Admin - Saroj Jangir

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