पीपासर रा राज बीरा जग में परचा भारी भजन

पीपासर रा राज बीरा जग में परचा भारी भजन

समराथल सो थल नहीं,
मंदिर जेड़ा मुकाम,
जांभोलाव सो सरवर नहीं,
जहाँ संत करे विश्राम।।

पीपासर रा राज बीरा,
जग में परचा भारी,
भगता रे बेगा आओ,
म्हारा जम्भेश्वर अवतारी।।

जिला जोधपुर गांव पीपासर,
आप लियो अवतारी,
मां हंसा थाने गोद खिलाया,
पिता लोहट जात पंवारी।
पीपासर रा राज बीरा,
जग में परचा भारी,
भगता रे बेगा आओ,
म्हारा जम्भेश्वर अवतारी।।

सखियां मंगल गाय गाय ने,
गढ़ सुदी मंगवाई,
गुड़िया रो अभिमान मिटायो,
पीपासर रे माई।
पीपासर रा राज बीरा,
जग में परचा भारी,
भगता रे बेगा आओ,
म्हारा जम्भेश्वर अवतारी।।

सेस के घर आप पधारे,
घर सेस की नारी,
जोगी रो थे वेश बनाया,
लीला जग सू न्यारी।
पीपासर रा राज बीरा,
जग में परचा भारी,
भगता रे बेगा आओ,
म्हारा जम्भेश्वर अवतारी।।

विश्नोई थारी करे सेवना,
इन कलजुग रे माई,
गोवर्धन थारे धोरे आयो,
गुरु चरणा में लेई।
पीपासर रा राज बीरा,
जग में परचा भारी,
भगता रे बेगा आओ,
म्हारा जम्भेश्वर अवतारी।।

पीपासर रा राज बीरा,
जग में परचा भारी,
भगता रे बेगा आओ,
म्हारा जम्भेश्वर अवतारी।।


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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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