भोलेनाथ हे प्रभु आरती उतारती

भोलेनाथ हे प्रभु आरती उतारती लिरिक्स

 
भोलेनाथ हे प्रभु आरती उतारती

भोलेनाथ हे प्रभु आरती उतारती
भोलेनाथ हे प्रभो आरती उतारती
तुझको मैं निहारती,
दिल में तू बसा हुआ,
फिर भी हूँ पुकारती
भावना संवारती
भोलेनाथ हे प्रभु आरती उतारती,
भोलेनाथ हे प्रभु आरती उतारती।

पास अपने आने दे,
दुखड़ा तो सुनाने दे
भक्ति भावना भरी,
आंसुओं की है लड़ी
पाँव हूँ पखारती
आरती उतारती
भोलेनाथ हे प्रभु आरती उतारती,
भोलेनाथ हे प्रभु आरती उतारती।

कांधे चढ़ के आयी हूँ,
चरणों में निवास दो
नाद डमरू का सुनूं,
वर तुम्हारी मैं बनू  
आँगन तेरा बुहारती
आरती उतारती
भोलेनाथ हे प्रभु आरती उतारती,
भोलेनाथ हे प्रभु आरती उतारती।

नंदी मुझको भा गया,
दिल में मेरे छा गया
तेरा ही तो अंश है,
भक्ति का वो पंत हैं
डमरू से निकले भारती,
आरती उतारती,
भोलेनाथ हे प्रभु आरती उतारती,
भोलेनाथ हे प्रभु आरती उतारती।

त्रिशूलधर हो नाथ तुम,
रखलो मुझको साथ तुम
त्रिशूल मेरे तुम हरो,
चरणों में अपने ही धरो
भक्ति भाव चाहती
आरती उतारती  
भोलेनाथ हे प्रभु आरती उतारती,
भोलेनाथ हे प्रभु आरती उतारती।

भस्म राग अंग अंग,
मस्त होते पीके भंग
भंग भक्ति की पिला,
पिला के शक्ति तू दिला
नाथ प्राण हारती
आरती उतारती  
भोलेनाथ हे प्रभु आरती उतारती,
भोलेनाथ हे प्रभु आरती उतारती।

देवों में देव श्रेष्ठ तुम,
सबसे ही हो ज्येष्ठ तुम
किसकी मैं शरण गहुँ,
तुझसे बस यही कहूं,
पद रज तेरी स्वीकारती
आरती उतारती  
भोलेनाथ हे प्रभु आरती उतारती,
भोलेनाथ हे प्रभु आरती उतारती।

तुझको मैं निहारती,
दिल में तू बसा हुआ
फिर भी हूँ पुकारती
भावना सवारती  
भोलेनाथ हे प्रभु आरती उतारती,
भोलेनाथ हे प्रभु आरती उतारती। 

भजन श्रेणी : शिव भजन ( Shiv Bhajan)


Bholenath Hey Prabhu | Chandana Dixit | Shiv Bhajan | Shiv Bhajan | Shivji Song | Lord Shiva Aarti
 
Song Credits:
Song Name: Bholenath Hey Prabhu
Singer: Chandana Dixit
Lyrics: Prof. J. K. Sehpal
Music Director: Surinder Kohli 
Album: Shiv Sagar Barah Jyotirling Part 2
Graphics: Sadique
 
सुंदर भजन में भोलेनाथ के प्रति गहरी भक्ति और उनके करीब आने की तड़प झलकती है। मन में उनकी छवि बसी है, फिर भी पुकार बार-बार उठती है, जैसे दिल की हर धड़कन भोलेनाथ को समर्पित हो। आरती उतारना, उनकी भक्ति में डूबना, मन को शांति और सुकून देता है। भक्त माँगता है कि भोलेनाथ पास बुलाएँ, उसका दुख सुन लें। आँसुओं की माला और पाँव पखारने का भाव उस प्रेम को दिखाता है, जो सच्ची श्रद्धा से भरा है। ये पुकार बताती है कि भक्त का मन हर दुख को भोलेनाथ के सामने रखकर हल्का हो जाना चाहता है। कंधे पर चढ़कर, मेहनत से उनके चरणों तक पहुँचने की चाह है। डमरू की ध्वनि सुनने और उनके आँगन में रहने की तमन्ना मन की पवित्रता को दर्शाती है। ये इच्छा है कि भोलेनाथ का साथ हर पल मिले, जैसे कोई बच्चा माँ-बाप के पास रहना चाहता है।
नंदी का प्रेम और डमरू की गूंज भोलेनाथ की महिमा का हिस्सा हैं। ये सब उनके ही अंश हैं, जो भक्त के मन को भक्ति की राह दिखाते हैं। नंदी का साथ ऐसा है, जैसे कोई सच्चा सखा हर कदम पर प्रेरणा दे। 

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