मेरे गुण अवगुण को पलड़े में न तोलो
मेरे गुण अवगुण को पलड़े में न तोलो तो अच्छा होगा
मेरे गुण अवगुण को पलड़े में,
न तोलो तो अच्छा होगा।
मेरे सिर पे गगरिया पापों की,
न खोलो तो अच्छा होगा।
मेरे गुण अवगुण...
कितने वादे करके हे भगवान,
पाया तुझसे मानव का तन।
मैंने वो निभाए हैं कि नहीं,
न बोलो तो अच्छा होगा।
मेरे गुण अवगुण...
मेरे पापों का मेरे पुण्यों का,
अच्छे या बुरे सब कर्मों का।
है तेरे पास हिसाब मगर,
न जोड़ो तो अच्छा होगा।
मेरे गुण अवगुण...
ना सेवा की ना पूजा की,
फिर भी तुमसे है आस लगी।
छोड़ो ये झूठा भ्रम सही,
न तोड़ो तो अच्छा होगा।
मेरे गुण अवगुण को पलड़े में,
न तोलो तो अच्छा है।
मेरे सर पे गगरिया पापों की,
न खोलो तो अच्छा है।
मेरे गुण अवगुण...
न तोलो तो अच्छा होगा।
मेरे सिर पे गगरिया पापों की,
न खोलो तो अच्छा होगा।
मेरे गुण अवगुण...
कितने वादे करके हे भगवान,
पाया तुझसे मानव का तन।
मैंने वो निभाए हैं कि नहीं,
न बोलो तो अच्छा होगा।
मेरे गुण अवगुण...
मेरे पापों का मेरे पुण्यों का,
अच्छे या बुरे सब कर्मों का।
है तेरे पास हिसाब मगर,
न जोड़ो तो अच्छा होगा।
मेरे गुण अवगुण...
ना सेवा की ना पूजा की,
फिर भी तुमसे है आस लगी।
छोड़ो ये झूठा भ्रम सही,
न तोड़ो तो अच्छा होगा।
मेरे गुण अवगुण को पलड़े में,
न तोलो तो अच्छा है।
मेरे सर पे गगरिया पापों की,
न खोलो तो अच्छा है।
मेरे गुण अवगुण...
मेरे गुण अवगुण को पलड़े में ना तोलो तो अच्छा होगा यही कोशिश रहती है एक अच्छा भजन लेकर आऊँ
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Author - Saroj Jangir
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