मैं गोपी मैं ग्वालिन ठहरी, श्याम है साथ हमारे रोम रोम में रमे हैं हरदम, गोपीनाथ हमारे, रोम रोम में रमे हैं हरदम।
जैसे तू नचाए, जैसे तू नचाए, जैसे तू नचाए नाचूंगी, मैं कठपुतली तेरे हाथ की, जैसे तू नचाए नाचूंगी, मैं कठपुतली तेरे हाथ की, मैं गोपी मैं गोपी, मैं गोपी गोपीनाथ की,
मैं गोपी गोपीनाथ की, मैं गोपी गोपीनाथ की, मैं गोपी गोपीनाथ की, मैं गोपी गोपीनाथ की, मैं कठपुतली तेरे हाथ की, मैं गोपी गोपीनाथ की।
मेरी डोर है तेरे हाथ में, मेरी डोर है तेरे हाथ में, इक बात है सौ बात की, मैं गोपी मैं गोपी, मैं गोपी गोपीनाथ की, मैं गोपी गोपीनाथ की, मैं गोपी गोपीनाथ की,
Radha Rani Bhajan Lyrics in Hindi
मैं गोपी गोपीनाथ की, मैं गोपी गोपीनाथ की, मैं कठपुतली तेरे हाथ की, मैं गोपी गोपीनाथ की।
दिन रात लगी है तेरी धुन, दिन रात लगी है तेरी धुन, तेरी दासी मैं दिन रात की, मैं गोपी मैं गोपी, मैं गोपी गोपीनाथ की, मैं गोपी गोपीनाथ की, मैं गोपी गोपीनाथ की, मैं गोपी गोपीनाथ की, मैं गोपी गोपीनाथ की,
मैं कठपुतली तेरे हाथ की, मैं गोपी गोपीनाथ की।
मुझे दीवानी तेरे नाम की, मुझे दीवानी तेरे नाम की, कहती हैं सखियां साथ की, मैं गोपी मैं गोपी, मैं गोपी गोपीनाथ की, मैं गोपी गोपीनाथ की, मैं गोपी गोपीनाथ की, मैं गोपी गोपीनाथ की, मैं गोपी गोपीनाथ की, मैं गोपी गोपीनाथ की, मैं गोपी गोपीनाथ की, जैसे तू नचाए नाचूंगी, मैं कठपुतली तेरे हाथ की, मैं गोपी गोपीनाथ की, मैं गोपी गोपीनाथ की, मैं गोपी गोपीनाथ की, मैं गोपी गोपीनाथ की।
श्रीकृष्ण को गोपीनाथ कहते हैं इसका अर्थ है गोपियों के स्वामी। वृंदावन में श्रीकृष्ण की बंसी की मधुर धुन पर मोहित होकर गोपियां उनकी भक्ति में लीन हो गई थीं। रासलीला के माध्यम से उन्होंने प्रेम और आत्मसमर्पण का दिव्य संदेश दिया। भक्ति परंपरा में गोपियां जीवात्मा का प्रतीक हैं और श्रीकृष्ण परमात्मा के। गोपियों ने संसार के बंधनों को त्यागकर केवल कृष्ण को ही अपना सर्वस्व माना। इसलिए वे गोपीनाथ कहलाए। यह नाम प्रेम, भक्ति और पूर्ण समर्पण का रूप है। जय गोपीनाथ।
Devi Neha Saraswat Bhajan Main Gopi Gopinath Ki | Latest Radha Krishna Bhajan |
Song: Main Gopi Gopinath KI Singer: Devi Neha Saraswat Lyrics: Ashutosh Goyal & Sushil Kumar