म्हाने राम नाम धुन लागी आज सतसंग भजन
म्हाने राम नाम धुन लागी आज सतसंग भजन
म्हाने राम नाम धुन लागी आज,सतसंग में म्हारो मन लाग्यो,
म्हे तो मोह माया ने त्यागी आज,
सतसंग में म्हारो मन लाग्यो,
ऐसी लगन हरी संग लागी आज,
सतसंग में म्हारो मन लाग्यो।
सब बंधन जग का छूट्या आज,
सत्संग में म्हारों मन लाग्यो,
हरी चरणां में रम जाऊ आज,
सतसंग में म्हारो मन लाग्यो।
म्हाने राम नाम धुन लागी आज,
सतसंग में म्हारो मन लाग्यो।
गुरु अंतर का पट खोल्या आज,
सतसंग में म्हारो मन लाग्यो,
हरी नाम बिना नहीं दूजो काज,
सतसंग में म्हारो मन लाग्यो,
म्हने राम नाम धुन लागि आज,
सतसंग में म्हारो मन लाग्यो।
म्हाने राम नाम धुन लागी आज,
सतसंग में म्हारो मन लाग्यो।
म्हारे रोम रोम में बस गया राम,
सतसंग में म्हारो मन लाग्यो,
हरी कारण छोड़ी लोक ने लाज,
सतसंग में म्हारो मन लाग्यो,
म्हाने राम नाम धुन लागी आज,
सतसंग में म्हारो मन लाग्यो।
म्हारा सपना में रामजी पधार्या आज,
सत्संग में म्हारो मन लाग्यो,
म्हारी जनम जनम की मिट गई प्यास,
सतसंग में म्हारो मन लाग्यो,
म्हाने राम नाम धुन लागी आज,
सतसंग में म्हारो मन लाग्यो।
मने मिल गयो राम को आशीर्वाद,
सत्संग में म्हारो मन लाग्यो,
मैं तो झूम झूम हरी गुण गाऊं आज,
सतसंग में म्हारो मन लाग्यो,
म्हाने राम नाम धुन लागी आज,
सतसंग में म्हारो मन लाग्यो।
म्हाने राम नाम धुन लागी आज,
सतसंग में म्हारो मन लाग्यो,
म्हे तो मोह माया ने त्यागी आज,
सतसंग में म्हारो मन लाग्यो,
ऐसी लगन हरी संग लागी आज,
सतसंग में म्हारो मन लाग्यो।
सब बंधन जग का छूट्या आज,
सत्संग में म्हारों मन लाग्यो,
हरी चरणा में रम जाऊ आज,
सतसंग में म्हारो मन लाग्यो।
म्हाने राम नाम धुन लागी आज,
सतसंग में म्हारो मन लाग्यो।
भजन श्रेणी : राम भजन (Ram Bhajan)
मने रामनाम धुन लागी | Mane Ram Nam Dhun Lagi | Ram Dhun Lagi | Kamlesh Barot | Hindi Bhajan
Mahane Raam Naam Dhun Lagi Aaj,
Mujhe Satsang Pasand Hai,
Mahe To Moh Maaya Ne Tyaagi Aaj,
Mujhe Satsang Pasand Hai,
Aisi Lagaan Hari Sang Lagi Aaj,
Mujhe Satsang Achchha Laga.
Sab Bandhan Jag Ka Chut Aaj,
Mujhe Satsang Achchha Laga,
Raam Charan Mein Ram Jao Aaj,
Mujhe Satsang Achchha Laga.
Mahane Raam Naam Dhun Lagi Aaj,
Mujhe Satsang Achchha Laga.
❖Song : Mane Ram Nam Dhun Lagi
❖Title : Ram Dhun Lagi
❖Singer :Kamlesh Barot
❖Music :Shailesh Thakar
❖Label : Soormandir
जब सत्संग की वो महफिल जमती है, तो जैसे दिल में कोई पुरानी कुंडी खुल जाती है। राम नाम की धुन अचानक ऐसी लग जाती है कि रोम-रोम में गूँजने लगती है, मोह-माया के सारे बंधन खुद-ब-खुद टूट जाते हैं। मन कहता है अब बस हरी के चरणों में ही रमना है, दुनिया की हर लाज-शर्म छोड़कर सिर्फ उनका नाम गुनगुनाना है। गुरु ने अंतर का पट खोल दिया तो पता चला, नाम के बिना कोई दूसरा काम नहीं, कोई दूसरी राह नहीं। सत्संग में बैठे-बैठे वो लगन ऐसी पकड़ लेती है कि जनम-जनम की प्यास मिट जाती है, सपनों में भी राम जी पधार जाते हैं, जैसे घर आ गए हों।
फिर झूम-झूमकर हरी के गुण गाने लगते हैं, आशीर्वाद मिल गया तो मन हल्का हो जाता है, जैसे बोझ उतर गया हो। राम नाम की वो धुन अब सांसों में बस गई है, हर पल उसी के साथ जीना है, उसी के साथ चलना है। सत्संग ने जो लगाव जगाया, वो अब कभी नहीं छूटेगा—बस यही लगन हरी संग बनी रहे, यही राम नाम की मधुर धुन बजती रहे। आप सभी पर ईश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री राम जी की।
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