सब जग ईश्वर रूप लखावे गीता माँ भजन

सब जग ईश्वर रूप लखावे गीता माँ भजन

सब जग ईश्वर~रूप लखावे,
गीता माँ की दीक्षा है,
ईश्वर~नाम निशान मिटावे,
भ्रष्ट आज की शिक्षा है।।

दैवी सम्पत्ति के गुण लावे,
गीता माँ की दीक्षा है,
असुर भाव जग में फैलावे,
भ्रष्ट आज की शिक्षा है।।

पैंड़~पैंड़ पर धरम सिखावे,
गीता माँ की दीक्षा है,
धरम~विरोधी पाठ पढ़ावे,
भ्रष्ट आज की शिक्षा है।।

स्वार्थ छोड़ करो जग~सेवा,
गीता माँ की दीक्षा है,
कारण बिना बने दुख~देवा,
भ्रष्ट आज की शिक्षा है।।

हरि~अर्पित शुचि भोजन पाना,
गीता माँ की दीक्षा है,
अण्डे~मांस तामसी खाना,
भ्रष्ट आज की शिक्षा है।।

सबही के हित में रत रहना,
गीता माँ की दीक्षा है,
औरों का उत्कर्ष न सहना,
भ्रष्ट आज की शिक्षा है।।

ऊपर अलग एक हो भीतर,
गीता माँ की दीक्षा है,
ऊपर एक अलग हो भीतर,
भ्रष्ट आज की शिक्षा है।।

सब महँ आत्म~भाव अपनाना,
गीता माँ की दीक्षा है,
वर्ण~भेद तजि संग महँ खाना,
भ्रष्ट आज की शिक्षा है।।

अक्षय सुख का अनुभव करना,
गीता माँ की दीक्षा है,
राग~द्वेष महँ हरदम जलना,
भ्रष्ट आज की शिक्षा है।।

बिनु दीक्षा के घातक शिक्षा,
देखो करो परीक्षा है,
वो शिक्षा भारत में कैसे,
यही बड़ी समीक्षा है।।

सब जग ईश्वर~रूप लखावे,
गीता माँ की दीक्षा है,
ईश्वर~नाम निशान मिटावे,
भ्रष्ट आज की शिक्षा है।।



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Saroj Jangir Author Admin - Saroj Jangir

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