राम है नाम या है खुदा तेरा शुक्र भजन
राम है नाम या है खुदा तेरा शुक्र भजन
राम है नाम या है खुदा तेरा,
शुक्र कैसे करूं सदा आप का।।
कुछ लोग तुमको हिंदू हैं कहते,
कहते हैं कि साईं मंदिर में रहते,
कुछ बताती है मस्जिद पता आपका,
शुक्र कैसे करूं सदा आप का।।
भटके थे दर-दर हम मारे-मारे,
लगाई है किश्ती, तू ही ये किनारे,
बन गया कर्म है दुआ आपका,
शुक्र कैसे करूं सदा आप का।।
ज़माने ने जब तुम पर उंगली उठाई,
क्या आपका कुछ भी बिगड़ा है साईं?
कल्पना और रही न घटा आपका,
शुक्र कैसे करूं सदा आप का।।
शुक्र कैसे करूं सदा आप का।।
कुछ लोग तुमको हिंदू हैं कहते,
कहते हैं कि साईं मंदिर में रहते,
कुछ बताती है मस्जिद पता आपका,
शुक्र कैसे करूं सदा आप का।।
भटके थे दर-दर हम मारे-मारे,
लगाई है किश्ती, तू ही ये किनारे,
बन गया कर्म है दुआ आपका,
शुक्र कैसे करूं सदा आप का।।
ज़माने ने जब तुम पर उंगली उठाई,
क्या आपका कुछ भी बिगड़ा है साईं?
कल्पना और रही न घटा आपका,
शुक्र कैसे करूं सदा आप का।।
साईं शुक्र कैसे करूँ आप का Sai Shukra Kaise Karun Aap Ka I SUSHILA I Sai Bhajan I Full Audio Song
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Sai Bhajan: Sai Shukra Kaise Karun Aap Ka
Singer: Sushila
Music Director: Pandit Jwala Prasad
Lyricist: Jitendra Raghuvanshi
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Music Director: Pandit Jwala Prasad
Lyricist: Jitendra Raghuvanshi
उस परम शक्ति का नाम चाहे कोई राम कहे या खुदा, वह हर रूप में एक ही सत्य है, जो सभी के हृदय में समाया है। वह न मंदिर तक सीमित है, न मस्जिद में बंधा; उसकी उपस्थिति हर जगह, हर हृदय में है। उसकी कृपा का आभार व्यक्त करना शब्दों से परे है, क्योंकि उसका प्रेम और करुणा अनंत है। वह हर प्राणी को अपने प्रेम से जोड़ती है, और उसकी महिमा को समझने के लिए हृदय की गहराइयों में उतरना पड़ता है।
जब जीवन में भटकन और दुख घेर लेते हैं, तब वह शक्ति एकमात्र किनारा बनती है, जो डगमगाती नैया को सहारा देती है। उसकी कृपा से हर कर्म दुआ बन जाता है, और जीवन एक नई रोशनी से जगमगाने लगता है। दुनिया चाहे कितनी भी उंगलियाँ उठाए, उस शक्ति की महिमा कभी कम नहीं होती। वह सदा अपने प्रेम और करुणा से हर प्राणी को आलोकित करती है, और उसकी कृपा की छाया कभी घटती नहीं।
जब जीवन में भटकन और दुख घेर लेते हैं, तब वह शक्ति एकमात्र किनारा बनती है, जो डगमगाती नैया को सहारा देती है। उसकी कृपा से हर कर्म दुआ बन जाता है, और जीवन एक नई रोशनी से जगमगाने लगता है। दुनिया चाहे कितनी भी उंगलियाँ उठाए, उस शक्ति की महिमा कभी कम नहीं होती। वह सदा अपने प्रेम और करुणा से हर प्राणी को आलोकित करती है, और उसकी कृपा की छाया कभी घटती नहीं।
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Author - Saroj Jangir
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