वो पर्दे के पीछे जो पर्दा-नशीन है भजन

वो पर्दे के पीछे जो पर्दा-नशीन है


उठा पर्दा, दिखा जलवा,
दीवाने ख़ास आए हैं।
सुनाने हाले-दिल मोहन,
तुम्हारे पास आए हैं।।

वो पर्दे के पीछे, जो पर्दा-नशीन है,
मेरा सांवरा है ये, मुझको यक़ीन है।।

तलबगार उसका है, ये सारा ज़माना,
कोई है पगला, तो कोई दीवाना।
दिल लूटने का उसे शौक़ कम नहीं है,
वो पर्दे के पीछे, जो पर्दा-नशीन है।।

उठती है जब भी दिल-ए-बेकरारी,
तो आता है बाहर, बाँके बिहारी।
रसीला, रंगीला, बड़ा ही हसीन है,
वो पर्दे के पीछे, जो पर्दा-नशीन है।।

ये पर्दा हटा दो, तड़प दूर कर दो,
मेरी भावनाओं में श्याम रस भर दो।
मोरी चुनरिया तोरे रंग में रंगीन है,
वो पर्दे के पीछे, जो पर्दा-नशीन है।।


परदे के पीछे - डॉ लता परदेसी | गोविंद सरस्वती | श्री केवल कृष्ण मधुप | चैनल दिव्य

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Parde Ke Piche
Singer - Dr Lata Pardesi
Music - Govind Saraswati
Lyrics - श्री केवल कृष्ण मधुप

कृष्ण की उपस्थिति को रहस्य और पर्दे के प्रतीक के माध्यम से दर्शाया गया है। उनके दर्शन के लिए मन में गहरी तड़प और उत्कंठा है, क्योंकि वे प्रत्यक्ष रूप में नहीं, बल्कि पर्दे के पीछे छिपे रहते हैं। फिर भी, विश्वास अटूट है कि वही सांवरा, वही मोहन, उसी पर्दे के पीछे विराजमान हैं। संसार का हर व्यक्ति उनकी झलक पाने के लिए व्याकुल है—कोई दीवाना है, कोई पागल, सब उनकी मोहक छवि के लिए लालायित हैं। कृष्ण के आकर्षण और उनकी लीला का जादू ऐसा है कि हर दिल को अपनी ओर खींच लेता है

जब मन में बेचैनी और प्रेम की तीव्रता बढ़ती है, तब कृष्ण स्वयं प्रकट होकर अपने भक्तों को आनंदित करते हैं। उनकी छवि रंगीली, रसीली और अत्यंत सुंदर है। मन में यही कामना है कि यह पर्दा हट जाए, सारी तड़प मिट जाए और कृष्ण के रंग में मन पूरी तरह रंग जाए। कृष्ण की उपस्थिति से ही जीवन में रस, रंग और आनंद का संचार होता है। उनका प्रेम इतना गहरा है कि मन, तन और भावनाएँ सब उसी में डूब जाती हैं। पर्दे के पीछे छिपे कृष्ण को पहचानना और उनके प्रेम में रंग जाना ही सच्चा आध्यात्मिक अनुभव है

Parde Ke Piche
Singer - Dr Lata Pardesi
Music - Govind Saraswati
Lyrics - श्री केवल कृष्ण मधुप

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