मुझे तुमने दाता बहुत कुछ दिया है साईं भजन

मुझे तुमने दाता बहुत कुछ दिया है साईं भजन

मुझे तुमने दाता बहुत कुछ दिया है,
मुझे तुमने दाता बहुत कुछ दिया है।
तेरा शुक्रिया है,
तेरा शुक्रिया है।
मुझे तुमने दाता बहुत कुछ दिया है,
तेरा शुक्रिया है,
तेरा शुक्रिया है।।

ना मिलती अगर दी हुई दात तेरी,
तो क्या थी ज़माने में औकात मेरी।
तुम्ही ने तो जीने के काबिल किया है,
तेरा शुक्रिया है,
तेरा शुक्रिया है।
मुझे तुमने दाता बहुत कुछ दिया है।।

मुझे है सहारा तेरी बंदगी का,
है जिसपर गुज़ारा मेरी ज़िन्दगी का।
मिला मुझको जो कुछ तुम्ही से मिला है,
तेरा शुक्रिया है,
तेरा शुक्रिया है।
मुझे तुमने दाता बहुत कुछ दिया है।।

किया कुछ ना मैंने, शरमसार हूँ मैं,
तेरी रहमतों का तलबगार हूँ मैं।
दिया कुछ नहीं, बस लिया ही लिया है,
तेरा शुक्रिया है,
तेरा शुक्रिया है।
मुझे तुमने दाता बहुत कुछ दिया है।।

मिला मुझको जो कुछ बदौलत तुम्हारी,
मेरा कुछ नहीं, सब है दौलत तुम्हारी।
उसे क्या कमी जो तेरा हो लिया है,
तेरा शुक्रिया है,
तेरा शुक्रिया है।
मुझे तुमने दाता बहुत कुछ दिया है।।

मेरा ही नहीं, तू सभी का है दाता,
तू ही सबको देता, तू ही है खिलाता।
तेरा ही दिया मैंने खाया पिया है,
तेरा शुक्रिया है,
तेरा शुक्रिया है।
मुझे तुमने दाता बहुत कुछ दिया है,
तेरा शुक्रिया है,
तेरा शुक्रिया है।
मुझे तुमने दाता बहुत कुछ दिया है।।


Tera Shukriya Hai | Siddarth Mohan | Sai Baba Song | Sai Baba Bhajan | Bhakti Song | Baba Songs

ऐसे ही अन्य भजनों के लिए आप होम पेज / गायक कलाकार के अनुसार भजनों को ढूंढें.
 

पसंदीदा गायकों के भजन खोजने के लिए यहाँ क्लिक करें।

 
Song Name: Tera Shukriya Hai
Singer: Siddarth Mohan
Lyricist: Traditional
Music Director: Siddharth Mohan
Album: Tera Shukriya Hai
Graphics: Sadique
 
भक्त का हृदय जब उस परम सत्ता की कृपा और दया को अनुभव करता है, तब वह कृतज्ञता से भर उठता है, यह महसूस करते हुए कि उसके जीवन का हर सुख, हर उपलब्धि, हर सांस उसी की देन है। यह कृतज्ञता केवल शब्दों तक सीमित नहीं, बल्कि एक गहन भावना है, जो भक्त को उस सत्य के प्रति नतमस्तक कर देती है, जिसने उसे न केवल जीने के काबिल बनाया, बल्कि उसे वह सब कुछ प्रदान किया, जो संसार में उसकी औकात से कहीं अधिक है। यह विश्वास भक्त को उस अनंत दाता के प्रति पूर्ण समर्पण की ओर ले जाता है, जो बिना किसी अपेक्षा के हर प्राणी के जीवन को अपनी कृपा से संवारता है। यह भावना भक्त के मन को एक ऐसी शांति और संतुष्टि से भर देती है, जो उसे हर परिस्थिति में उस सत्ता का आभार मानने को प्रेरित करती है।

उस परम सत्ता की बंदगी भक्त के लिए वह सहारा बन जाती है, जिसके बिना उसका जीवन अधूरा है। यह भक्ति और विश्वास ही उसे हर कठिनाई में संबल देता है, और उसे यह एहसास कराता है कि उसके पास जो कुछ भी है—चाहे वह सुख हो, धन हो, या जीवन की छोटी-बड़ी खुशियाँ—सब कुछ उसी दाता की देन है। भक्त अपने आप को उस कृपा का तलबगार मानता है, यह स्वीकार करते हुए कि उसने स्वयं कुछ भी अर्जित नहीं किया, बल्कि सब कुछ उस सत्ता की रहमत से प्राप्त हुआ है। यह सत्य कि वह सत्ता न केवल उसका, बल्कि समस्त प्राणियों का पालनहार और दाता है, भक्त के हृदय को और भी विनम्र बना देता है। इस कृतज्ञता में डूबकर भक्त उस अनंत कृपा के प्रति अपने जीवन को पूर्णतः समर्पित कर देता है, जो हर प्राणी को जीवन, प्रेम और सुख प्रदान करती है। 
Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

इस ब्लॉग पर आप पायेंगे मधुर और सुन्दर भजनों का संग्रह । इस ब्लॉग का उद्देश्य आपको सुन्दर भजनों के बोल उपलब्ध करवाना है। आप इस ब्लॉग पर अपने पसंद के गायक और भजन केटेगरी के भजन खोज सकते हैं....अधिक पढ़ें

Next Post Previous Post