आई मैं तोरे अंगना माँ भवानी भजन

आई मैं तोरे अंगना माँ भवानी भजन

(मुखड़ा)
आई मैं तोरे अंगना मां भवानी,
आई मैं तोरे अंगना मां भवानी,
पड़ी है संकट में हो,
पड़ी है संकट में ये ज़िंदगानी,
आई मैं तोरे अंगना मां भवानी।।

(अंतरा)
बनालो मुझे दासी अपने घर की,
बनालो मुझे दासी अपने घर की,
यही है मेरी लालसा हो,
यही है मेरी लालसा हो मातरानी,
आई मैं तोरे अंगना मां भवानी।।

चंदा ऐसा मुखड़ा चम चम चमके,
चंदा ऐसा मुखड़ा चम चम चमके,
मैया तेरी चुनरी हो,
मैया तेरी चुनरी हो लासानी,
आई मैं तोरे अंगना मां भवानी।।

खड़े सब तेरे आके द्वारे,
खड़े सब तेरे आके द्वारे,
दया हो मेरी मैया हो,
दया हो मेरी मैया हो तू है दानी,
आई मैं तोरे अंगना मां भवानी।।

यही एक विनती सुन लो मेरी,
यही एक विनती सुन लो मेरी,
दरश मुझे दे दो हो,
दरश मुझे दे दो हो मां भवानी,
आई मैं तोरे अंगना मां भवानी।।

देखा है तेरी लीला कंस पापी,
देखा है तेरी लीला कंस पापी,
अमर तेरी मैया हो,
अमर तेरी मैया है कहानी,
आई मैं तोरे अंगना मां भवानी।।

(पुनरावृत्ति)
आई मैं तोरे अंगना मां भवानी,
आई मैं तोरे अंगना मां भवानी,
पड़ी है संकट में हो,
पड़ी है संकट में ये ज़िंदगानी,
आई मैं तोरे अंगना मां भवानी।।


Aayi Main Tere Dware Durga Bhawani

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भक्त का हृदय संकटों से घिरा हुआ माँ भवानी के आंगन में शरण माँगता है, जहाँ वह अपनी जिंदगानी को उनके चरणों में समर्पित करता है। यह पुकार केवल एक आश्रय की खोज नहीं, बल्कि माँ की दासी बनने की गहरी लालसा है, जो भक्त के मन की सच्ची भक्ति और समर्पण को दर्शाती है। माँ का चाँद-सा चमकता मुखड़ा और उनकी लासानी चुनरी भक्त के लिए वह दिव्य दृश्य है, जो उसके मन को माँ की महिमा में डुबो देता है। यह भक्ति का वह स्वरूप है, जो माँ की कृपा को भक्त के जीवन का एकमात्र सहारा बनाता है, और उसे यह विश्वास दिलाता है कि माँ की दया से उसका हर संकट दूर हो जाएगा।

माँ के द्वार पर खड़े भक्तों की भीड़ और उनकी पुकार माँ की दानशीलता और करुणा की महिमा को उजागर करती है। भक्त केवल माँ के दर्शन की कामना करता है, यह जानते हुए कि उनकी एक कृपादृष्टि ही उसके जीवन को सार्थक कर देगी। माँ की अमर कहानी, जिसने कंस जैसे पापियों का अंत किया, भक्त के लिए एक प्रेरणा है, जो उसे माँ की शक्ति और लीला में अटल विश्वास रखने को प्रेरित करती है। यह भक्ति का वह भाव है, जो माँ के आंगन को भक्त के लिए सबसे पवित्र स्थल बनाता है, जहाँ वह अपनी सारी विनतियों को माँ के चरणों में रखकर, उनके प्रेम और दया में अपने जीवन को संवारने की आस रखता है।
 
Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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