राजे गंगा किनारे एक तिरिया सूं ठाड़ी अरज करे

राजे गंगा किनारे एक तिरिया सूं ठाड़ी अरज करे

राजे, गंगा किनारे,
एक तिरिया सूं ठाड़ी अरज करे।
गंगे! एक लहर हमें देऊ,
कि जा में डूब जाइयों।।

कै दुख री तोहे सासुरी-सुसर को,
कै तेरे पिया परदेस।
के दुख री तेरे मात-पिता को,
के मां जाये बीर,
काहे दुख डूबियो।।

ना दुख री मोहे सासुरी-सुसर को,
ना मेरे पिया परदेस।
ना दुख री मोहे मात-पिता को,
ना मां जाये बीर।।

सासु-बहु कही ना ए बोले,
ननद-भाभी ना कहे।
ना हो राजे, वे मोहे बांझ कहीं,
टेरै सो काटो गई।।



गंगा किनारे एक तिरिया | सोहर | Ganga Kinare Ek tiriya tiriya dukh robai|#sohar|saraswati vishwakarma

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Saroj Jangir Author Admin - Saroj Jangir

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