इधर अंजनी घर हनुमान जन्में भजन

इधर अंजनी घर हनुमान जन्में भजन

इधर अंजनी घर हनुमान जन्मे,
उधर दशरथ घर भगवान जन्मे,
महलों में खुशियाँ अयोध्या में आनंद,
पवन पिता झूम रहे मन में,
इधर अंजनी घर हनुमान जन्मे,
उधर दशरथ घर भगवान जन्मे।।

हनुमान रूप में त्रिलोकीनाथ,
राम स्वरूप में स्वयं श्री विष्णु,
हनुमान खेलें कुटिया में,
श्रीराम खेलें राज-आँगन में,
इधर अंजनी घर हनुमान जन्मे,
उधर दशरथ घर भगवान जन्मे।।

सोने के पालने में श्रीराम झूलें,
माँ की बइयाँ में हनुमान झूलें,
वहाँ कौशल्या लोरी सुनावे,
अंजनी मोह दिखावे हनुमत में,
इधर अंजनी घर हनुमान जन्मे,
उधर दशरथ घर भगवान जन्मे।।

महलों में रघुवर की बाल लीला,
जंगल में मंगल करे मंगलकारी,
देवों के हित जन्मे दोनों,
दोनों ही मगन हरी भजन में,
इधर अंजनी घर हनुमान जन्मे,
उधर दशरथ घर भगवान जन्मे।।

दोनों चरणन चूमे "कमलसिंह",
एक गुरु, एक चेला अलबेला,
राम बिना हनुमान अधूरे,
हनुमान बिना राम उलझन में,
इधर अंजनी घर हनुमान जन्मे,
उधर दशरथ घर भगवान जन्मे।।



Balaji Bhajan - Anjani Ghar Hanumat Janme | Balaji Sakat Kato | Narender Kaushik

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Saroj Jangir Author Admin - Saroj Jangir

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