अपनी ममता की शरण में ले लो माँ भजन
अपनी ममता की शरण में ले लो माँ भजन
फ़िज़ाओं की हवा कह रही है,
ख़ुशी की मुबारक घड़ी आ गई है,
सजी लाल चुनरी में शारदा मैया,
फ़लक से ज़मीं पे चली आ रही है।
(मुखड़ा)
अपनी ममता की शरण में ले लो माँ,
निर्बल को अपना सहारा दे दो माँ।
दुःख के तूफ़ां ने सताया है मुझको,
जीवन कश्ती को सहारा दे दो माँ।।
अपनी ममता की शरण में ले लो माँ,
निर्बल को अपना सहारा दे दो माँ।।
(अंतरा 1)
रात दिन दर पे खड़े फरियाद करते हैं,
भूल जग को बस तुम्हें हम याद करते हैं।
है पड़ा मंझधार, बेड़ा पार कर दो माँ,
हूँ दुखों से मैं घिरा, उद्धार कर दो माँ।
अपनी शक्ति का नज़ारा दे दो माँ,
निर्बल को अपना सहारा दे दो माँ।।
(अंतरा 2)
तेरे चेहरे की चमक सूरज के जैसी है,
मेरे मन में तू बसी मूरत के जैसी है।
रात दिन हम याद करते हैं छवि तेरी,
शीश पे रख दे दया का हाथ माँ मेरी।
अपना दर्शन हमको प्यारा दे दो माँ,
निर्बल को अपना सहारा दे दो माँ।।
(अंतरा 3)
कोई बोले शारदा, कोई कहे काली,
अपने आँचल की है माँ झोली भरी खाली।
फैली है मिन्नत की झोली, तुम उसे भर दो,
है घिरा ‘आशीष’ दुख में, दूर तुम कर दो।
कष्टों से सबको छुटकारा दे दो माँ,
निर्बल को अपना सहारा दे दो माँ।।
(पुनरावृत्ति मुखड़ा)
अपनी ममता की शरण में ले लो माँ,
निर्बल को अपना सहारा दे दो माँ।
दुःख के तूफ़ां ने सताया है मुझको,
जीवन कश्ती को सहारा दे दो माँ।।
अपनी ममता की शरण में ले लो माँ,
निर्बल को अपना सहारा दे दो माँ।।
ख़ुशी की मुबारक घड़ी आ गई है,
सजी लाल चुनरी में शारदा मैया,
फ़लक से ज़मीं पे चली आ रही है।
(मुखड़ा)
अपनी ममता की शरण में ले लो माँ,
निर्बल को अपना सहारा दे दो माँ।
दुःख के तूफ़ां ने सताया है मुझको,
जीवन कश्ती को सहारा दे दो माँ।।
अपनी ममता की शरण में ले लो माँ,
निर्बल को अपना सहारा दे दो माँ।।
(अंतरा 1)
रात दिन दर पे खड़े फरियाद करते हैं,
भूल जग को बस तुम्हें हम याद करते हैं।
है पड़ा मंझधार, बेड़ा पार कर दो माँ,
हूँ दुखों से मैं घिरा, उद्धार कर दो माँ।
अपनी शक्ति का नज़ारा दे दो माँ,
निर्बल को अपना सहारा दे दो माँ।।
(अंतरा 2)
तेरे चेहरे की चमक सूरज के जैसी है,
मेरे मन में तू बसी मूरत के जैसी है।
रात दिन हम याद करते हैं छवि तेरी,
शीश पे रख दे दया का हाथ माँ मेरी।
अपना दर्शन हमको प्यारा दे दो माँ,
निर्बल को अपना सहारा दे दो माँ।।
(अंतरा 3)
कोई बोले शारदा, कोई कहे काली,
अपने आँचल की है माँ झोली भरी खाली।
फैली है मिन्नत की झोली, तुम उसे भर दो,
है घिरा ‘आशीष’ दुख में, दूर तुम कर दो।
कष्टों से सबको छुटकारा दे दो माँ,
निर्बल को अपना सहारा दे दो माँ।।
(पुनरावृत्ति मुखड़ा)
अपनी ममता की शरण में ले लो माँ,
निर्बल को अपना सहारा दे दो माँ।
दुःख के तूफ़ां ने सताया है मुझको,
जीवन कश्ती को सहारा दे दो माँ।।
अपनी ममता की शरण में ले लो माँ,
निर्बल को अपना सहारा दे दो माँ।।
Mamta Ki Sharan Mein Lelo Maa || Sharda Mata Bhajan || Ashish Akela || Sona Cassette
Video - Mamta Ki Sharan Mein Lelo Maa
Album - Kalyani Maa Sharda
Singer - Ashish Akela, Poornima Singh
Copyright - Tarang Music
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