माँ का नाम जपे जा हर पल भजन
माँ का नाम जपे जा हर पल भजन
(मुखड़ा)
माँ का नाम जप जा हर पल,
लागे न कोई मोल रे।
जय माता दी बोल रे तू,
जय माता दी बोल रे।।
(अंतरा)
माता रानी की मंत्र जो जपते,
माँ को लगते प्यारे।
महारानी माँ वैष्णो का तू,
निशदिन ध्यान लगा ले।
मन की अंगूठी में तू जड़ ले,
ये हीरा अनमोल रे।
जय माता दी बोल रे तू,
जय माता दी बोल रे।।
(अंतरा)
जिसने जो माँगा दे डाली,
ऐसी है माँ दानी।
इनसे न कोई भेद छुपा है,
सबके मन की जानी।
सबकी नेकी बदी रही माँ,
सच की तराजू तोल रे।
जय माता दी बोल रे तू,
जय माता दी बोल रे।।
(अंतरा)
लाल चुनरिया ओढ़ के बैठी,
गुफा में पिंडी रानी है।
माँ की महिमा कैसे जाने,
हम मूर्ख अज्ञानी हैं।
यहाँ वहाँ मत ढूँढ सरल तू,
भीतर अपने टटोल रे।
जय माता दी बोल रे तू,
जय माता दी बोल रे।।
(पुनरावृति)
माँ का नाम जप जा हर पल,
लागे न कोई मोल रे।
जय माता दी बोल रे तू,
जय माता दी बोल रे।।
माँ का नाम जप जा हर पल,
लागे न कोई मोल रे।
जय माता दी बोल रे तू,
जय माता दी बोल रे।।
(अंतरा)
माता रानी की मंत्र जो जपते,
माँ को लगते प्यारे।
महारानी माँ वैष्णो का तू,
निशदिन ध्यान लगा ले।
मन की अंगूठी में तू जड़ ले,
ये हीरा अनमोल रे।
जय माता दी बोल रे तू,
जय माता दी बोल रे।।
(अंतरा)
जिसने जो माँगा दे डाली,
ऐसी है माँ दानी।
इनसे न कोई भेद छुपा है,
सबके मन की जानी।
सबकी नेकी बदी रही माँ,
सच की तराजू तोल रे।
जय माता दी बोल रे तू,
जय माता दी बोल रे।।
(अंतरा)
लाल चुनरिया ओढ़ के बैठी,
गुफा में पिंडी रानी है।
माँ की महिमा कैसे जाने,
हम मूर्ख अज्ञानी हैं।
यहाँ वहाँ मत ढूँढ सरल तू,
भीतर अपने टटोल रे।
जय माता दी बोल रे तू,
जय माता दी बोल रे।।
(पुनरावृति)
माँ का नाम जप जा हर पल,
लागे न कोई मोल रे।
जय माता दी बोल रे तू,
जय माता दी बोल रे।।
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