किशोरी चली आवे हाय धीरे धीरे भजन

किशोरी चली आवे हाय धीरे धीरे भजन

किशोरी चली आवे हाय धीरे धीरे,
हां धीरे धीरे यमुना के तीरे,
कमर मटकावे हाय धीरे धीरे....

हाथों में कंगना पांव पायजेनिया,
हां पांव पायजेनिया,
पायल छनकावे हाय धीरे धीरे,
किशोरी चली आवे हाय धीरे धीरे....

नैनो में कजरा हाथों में गजरा,
हाथों में गजरा,
गुंगट सरकावे हाय धीरे धीरे,
किशोरी चली आवे हाय धीरे धीरे....

हाथ गगरिया सर पे चुनरिया,
हां सर पे चुनरिया,
चुनर लहरावे हाय धीरे धीरे,
किशोरी चली आवे हाय धीरे धीरे....



किशोरी चली आवे हाय धीरे धीरे#Naresh Malhotra

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किशोरी धीरे-धीरे यमुना तीर पर चली आती है, कमर मटकाती हर कदम पर। कंगन खनकते हाथों में, पायजेबिया पाँवों सी चमकती। पायल की छनक दिल को छू लेती है, जैसे कोई मीठी धुन बहे हवा में। साधकों को इश्वर का आशीर्वाद ऐसी सुंदरता से मिलता है, जैसे फूलों की लड़ी सी लिपट जाए जीवन में।

नैनों में कजरा, हाथों में गजरा, घूँघट सरकता शरम से। गगरिया हाथ में, चूनर सिर पर लहराती प्रेम की लहर। धीरे-धीरे ये चाल सबको बाँध लेती है, प्रेम की पुकार बन जाती है। जैसे कोई सपना साकार हो चले, वैसे मन झूम उठता है। आप सभी पर इश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री किशोरी जी! जय श्री राधे जी!
 
Saroj Jangir Author Admin - Saroj Jangir

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